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नारदा स्‍ट‍िंग: हमें भी दबाव में लाने की कोश‍िश होती है…जज ने कोर्ट में सुनाया वाकया

कोर्ट ने सीबीआई की दलील पर कहा कि वो चाहे तो अपने दफ्तर के घेराव के मामले में सीएम ममता बनर्जी और उनके कानून मंत्री पर एक्शन ले सकती है।

अपने मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद सीएम ममता ने बोला था सीबीआई दफ्तर पर धावा (फाइल फोटो)

नारदा स्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई बार उन्हें भी दबाव में लेने की कोशिश की जाती है। लेकिन वो इसकी परवाह नहीं करते। दरअसल, डबल बेंच ने यह वाकया सीबीआई की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता को बताया। वकील का कहना था कि टीएमसी नेताओं ने एजेंसी के अफसरों को दबाव में लेने के लिए कोलकाता हेडक्वार्टर पर धरना प्रदर्शन किया था।

जस्टिस बीआर गवई ने बताया कि 2013 में वो औरंगाबाद में तैनात थे। उस दौरान एक एंटीसिपेट्री बेल एप्लीकेशन की सुनवाई के दौरान महिला मोर्चा के लोग कोर्ट रूम में घुस गए थे। पुलिस ने उनसे कहा था कि वो फिलहाल कोई आदेश जारी न करें, लेकिन उन्होंने ओपन कोर्ट रूम में अपना आदेश सुनाया। वो किसी दबाव के आगे नहीं झुके। जस्टिस गवई और जस्टिस विनीत सरन की बेंच ने सीबीआई को कहा कि उन्हें अपना काम बेखौफ होकर करना चाहिए। कोर्ट ने सीबीआई की दलील पर कहा कि वो चाहे तो अपने दफ्तर के घेराव के मामले में सीएम ममता बनर्जी और उनके कानून मंत्री पर एक्शन ले सकती है।

डबल बेंच ने सीबीआई को कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपनी अपील वापस लेने की अनुमति दे दी, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के तीन नेताओं सहित चार नेताओं को नारद रिश्वत मामले में घर में ही नजरबंद रखने की अनुमति दी थी। बेंच ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि हाईकोर्ट के पांच जजों की बेंच नारदा रिश्वत मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की तरफ से पेश हुए सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता को अपनी अपील वापस लेने और सभी शिकायतों को हाईकोर्ट में उठाने की अनुमति दे दी। अदालत की सलाह के बाद सीबीआई ने अपनी याचिका वापस ले ली।

बेंच ने कहा- हमने मामले के गुण-दोष पर कोई विचार व्यक्त नहीं किया है और मामले में हमारी टिप्पणियां हमारे विचारों को प्रदर्शित नहीं करती हैं। कोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल और नेता भी हाईकोर्ट के समक्ष अपने मुद्दों को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अक्सर बड़ी बेंच गठित होती हैं तो वो आरोपियों की आजादी को तरजीह देती हैं, लेकिन ये पहले बार देखा जा रहा है कि सीबीईआई कोर्ट के जमानत देने के फैसले को हाईकोर्ट के 5 जजों की बेंच ने पलट दिया।

हाईकोर्ट ने 21 मई को पश्चिम बंगाल के दो मंत्रियों, एक विधायक और कोलकाता के पूर्व महापौर को जेल से हटाकर उनके घरों में ही नजरबंद करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने 24 मई को मामले में सुनवाई की और मामले में सुनवाई स्थगित करने इंकार कर दिया था। नारदा स्टिंग टेप मामले में पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री फिरहाद हाकिम, पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी, टीएमसी के विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व महापौर शोभन चटर्जी को सीबीआई ने पिछले सोमवार को गिरफ्तार किया था।

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