पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम सीट पर मतदान हुआ, जिसे राज्य की सबसे अहम सीटों में गिना जा रहा है। यहां से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं। मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला और शाम 6 बजे तक करीब 90.07 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। चुनाव आयोग के अनुसार अंतिम आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है।

नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत काफी पुरानी है। साल 2007 में यहीं से ममता बनर्जी ने सिंगूर के साथ मिलकर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया था। इसी आंदोलन ने उन्हें राज्य की सत्ता तक पहुंचाया और 2011 में उन्होंने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को खत्म कर मुख्यमंत्री पद हासिल किया। यही वजह है कि नंदीग्राम की सीट हर चुनाव में चर्चा का केंद्र बनी रहती है।

शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर सीट से भी उम्मीदवार हैं

शुभेंदु अधिकारी, जो कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे थे, ने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम से ममता को करीब 1900 वोटों से हराया था। इस बार भी यह मुकाबला प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु के पूर्व सहयोगी पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, शुभेंदु अधिकारी अपने गृह क्षेत्र के साथ-साथ कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

मतदान के दिन सुबह शुभेंदु अधिकारी अपने कांथी स्थित घर से निकलकर पहले वोट डालने पहुंचे। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम के अलग-अलग मतदान केंद्रों का दौरा किया और वहां की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कई जगहों पर बदलाव की बात दोहराई और दावा किया कि इस बार जनता परिवर्तन चाहती है।

मतदान के बाद उनके क्षेत्र में दौरे के दौरान विवाद भी सामने आए

हालांकि, उनके दौरे के दौरान कई जगहों पर विवाद भी सामने आए। ब्रजमोहन तिवारी हाई स्कूल स्थित बूथ पर उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्थानीय बीएलओ मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, बदनाकाचिरा इलाके में उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 के चुनाव में यहां 175 हिंदू मतदाताओं को धमकाया गया था। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों से यह भी कहा कि एक हत्या का आरोपी इलाके में घूमकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहा है।

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में हार रही है और कई जगहों पर वह अपने पोलिंग एजेंट तक नहीं तैनात कर पाई है। दूसरी ओर, टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर ने इन दावों को खारिज करते हुए अपनी जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों पर पूरा विश्वास है।

भीषण गर्मी के बावजूद नंदीग्राम में मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। कई मतदाताओं ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए सुरक्षा इंतजामों की सराहना की। एक महिला मतदाता शहनारा बीबी ने कहा कि माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वहीं, अन्य मतदाताओं ने रोजगार, विकास और शांति को अपनी प्राथमिकता बताया।

ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर बीजेपी और टीएमसी के झंडे साफ तौर पर नजर आए। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि इस बार वे उन सभी बूथों तक पहुंच पाए जहां 2021 में उन्हें जाने नहीं दिया गया था। उन्होंने कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और उनसे बातचीत भी की।

राजारामचक शिक्षानिकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में उन्होंने कहा कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और स्थिति पहले से बेहतर है। इस दौरान वे अपने प्रतिद्वंद्वी पवित्र कर के घर के पास स्थित बूथ पर भी पहुंचे, हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

मतदान के अंतिम समय में कुछ छिटपुट घटनाएं भी सामने आईं। जेलेमारा के एक बूथ पर टीएमसी ने आरोप लगाया कि उनके एक स्थानीय नेता पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमला किया। हालांकि बीजेपी ने इस आरोप को खारिज करते हुए उल्टा टीएमसी नेता को ही जिम्मेदार ठहराया।

एक अन्य घटना में, जब शुभेंदु अधिकारी एक बूथ से निकले तो कुछ लोगों ने “जय बांग्ला” के नारे लगाए और दावा किया कि इस बार उनकी हार तय है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इलाके में विकास का काम ममता बनर्जी ने किया है।

गौरतलब है कि 2021 के चुनाव के दौरान नंदीग्राम में भारी हिंसा देखने को मिली थी, जिसमें दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता घायल हुए थे और चुनाव के बाद 1000 से ज्यादा घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। इस बार भी चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच ध्रुवीकरण की राजनीति देखने को मिली, हालांकि मतदान के दिन स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण रही।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को जिस तरह करीब बानबे फीसद मतदान की खबर आई है, उससे साफ है कि इस बार वहां की जनता ने अपने मताधिकार को लेकर अपेक्षया ज्यादा सजगता दिखाई है। इसका एक कारण एसआइआर की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में मौजूद लोगों का अपने मताधिकार को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क होना भी हो सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक