West Bengal News: रेजिनगर के बेगुनबारी इलाके में बने एक छोटे से अस्थाई मंच पर बीजेपी बंगाल के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य पार्टी उम्मीदवार शंकरवर सरकार के बगल में खड़े हैं, जबकि अन्य लोग जगह पाने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं। यह जनसभा 100 से ज्यादा बाइक वाले एक प्रभावशाली रोड शो के समापन के बाद आयोजित की गई है।
मंच के चारों ओर जमा भीड़ में अधिकतर मुस्लिम हैं, जबकि अन्य लोग बालकनियों और छतों से देख रहे हैं। भट्टाचार्य कहते हैं, “पिछले चुनावों में हमारे उम्मीदवार को भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। अल्पसंख्यक मतदाता हमारे साथ नहीं थे। लेकिन यह चुनाव अलग है।”
80 प्रतिशत मुसलमान गांवों में रहते हैं- भट्टाचार्य
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से 6 अक्टूबर के उपचुनावों को अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक परीक्षा बताते हुए और उन्हें बीजेपी का साथ देने की बात कहने के कुछ दिनों बाद भट्टाचार्य कहते हैं, “80 प्रतिशत मुसलमान गांवों में रहते हैं और उनकी मासिक आय 5000 रुपये या उससे कम है। सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी भी कम है। इस स्थिति में बदलाव की जरूरत है।”
जहां एक ओर बीजेपी सरकार पर विरोधियों द्वारा पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया जा रहा है ताकि इस साल के विधानसभा चुनाव जीते जा सकें और तब से राज्य में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके, वहीं रेजिनगर में उपचुनाव के लिए , जहां लगभग 70% आबादी मुस्लिम है, पार्टी ने अपना नारा विकास की ओर मोड़ दिया है। साथ ही, पार्टी मुसलमानों से सीधे संपर्क साध रही है, जो राज्य में पहले शायद ही कभी देखने को मिला हो।
बाबरी मस्जिद- राम मंदिर का मुद्दा उठाने का समय नहीं- भट्टाचार्य
राज्य बीजेपी के अंदर उदारवादी चेहरे के रूप में देखे जाने वाले भट्टाचार्य कहते हैं, “हमारी सरकार के कार्यकाल के इन छह महीनों में क्या एक भी दंगा हुआ है? यह बाबरी मस्जिद- राम मंदिर का मुद्दा उठाने का समय नहीं है। अगले 20 वर्षों तक केंद्र और राज्य दोनों में हमारी सरकार रहेगी। आपको हमारे साथ रहना होगा। आपको चुनाव करना होगा।”
एक दिन बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान अधिकारी ने शक्तिपुर में एक जनसभा में इसी बात पर जोर दिया। भट्टाचार्य द्वारा बाबरी मस्जिद का उल्लेख जानबूझकर किया गया है। अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनावों में, रेजिनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने जीती थी।
कबीर को अपने बीजेपी प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले लगभग दोगुने वोट मिले, उन्हें 51.62% वोट मिले, जबकि बीजेपी को 27.02% और टीएमसी को 17.43% वोट मिले। रेजिनगर उपचुनाव इसलिए आवश्यक हो गया क्योंकि कबीर ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया और दूसरी सीट बरकरार रखी।
हुमायूं कबीर के बेटे रेजिनगर में उम्मीदवार
कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद अब रेजिनगर उपचुनाव में एजेयूपी के उम्मीदवार हैं। हालांकि, निर्वाचन क्षेत्र में उनकी उपस्थिति नगण्य है, क्योंकि कबीर का दावा है कि बीजेपी प्रशासन द्वारा उन्हें धमकाया जा रहा है, जिसमें मामले दर्ज करना भी शामिल है। उनका कहना है कि एजेयूपी केवल ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर ही चुनाव प्रचार करेगी।
बीजेपी की ओर से मुसलमानों को लुभाने और कबीर के पाले में आने से मुकाबला किसी भी तरफ जा सकता है। कबीर के अलावा, जो विधानसभा चुनाव से पहले एजेयूपी बनाने से पहले तृणमूल कांग्रेस में थे, इस खेमे में कांग्रेस, सीपीआई (एम) और टीएमसी के दोनों गुट शामिल हैं। सभी दलों ने मुस्लिम समुदाय से उम्मीदवार उतारे हैं।
नेशनल हाईवे 10 के किनारे कबीर द्वारा निर्मित बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के निर्माण स्थल पर निर्माण कार्य जारी है, जहां अर्थमूवर मशीनें काम कर रही हैं और ईंटों का ढेर लगा हुआ है। स्थल पर बने एक छोटे से कार्यालय में बैठे कबीर कहते हैं, “लगभग 10 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए हैं।”
मुझे पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा रहा- एजेयूपी नेता
एयूजेपी नेता कहते हैं, “मुझे पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ नए मामलों के अलावा, मेरी पार्टी के नेताओं के खिलाफ पुराने मामले भी फिर से खोले जा रहे हैं। उनमें से चौबीस को गिरफ्तार किया जा चुका है। हममें से बारह को जमानत मिल गई, लेकिन पुलिस मुझे पूछताछ के लिए बुलाती रही और मेरे समर्थकों को परेशान करती रही। इसीलिए मैंने फैसला किया है कि न तो मेरा बेटा और न ही मैं चुनाव प्रचार करेंगे।”
कबीर के अनुसार, मई से ही उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जब सरकार ने उनसे प्रतिकृति के नाम से बाबरी मस्जिद शब्द हटाने को कहा था। उन्होंने कहा, “मैंने इनकार कर दिया। मेरी सुरक्षा हटा ली गई है।”
अन्य उम्मीदवारों के बारे में कबीर कहते हैं कि उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा, “यह बीजेपी और मेरे बीच सीधा मुकाबला है और अगर निष्पक्ष चुनाव हुए तो मेरा बेटा जरूर जीतेगा। बाकी सभी पार्टियों की जमानत जब्त हो जाएगी। बीजेपी मुस्लिम वोटों को तोड़कर हिंदुओं को अपने पीछे एकजुट करने की कोशिश कर रही है। लेकिन निष्पक्ष चुनाव यह साबित कर देंगे कि जनता हमारे साथ है।”
लोकनाथपुर में चुनाव प्रचार कर रहे ममता टीएमसी के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी पुलिस द्वारा अपने मतदाताओं को धमकाने की बात भी कर रहे हैं। बंगाल की दूसरी सीट नंदीग्राम में, जहां 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं, ममता टीएमसी के उम्मीदवार ने आखिरी समय में अपना नाम वापस ले लिया, जिससे भाजपा पर पार्टी का हमला और तेज हो गया है।
चौधरी इससे पहले रेजिनगर सीट तीन बार जीत चुके हैं। अप्रैल में हुए चुनावों में ममता बनर्जी ने चौधरी की जगह अताउर रहमान को मैदान में उतारा था, लेकिन वे हार गए। चौधरी ने कहा, “हम कह रहे हैं कि वही बीजेपी का एकमात्र विकल्प हैं। नए मुख्यमंत्री केवल हिंदुओं के लिए बोलती और काम करती हैं। ममता बनर्जी ही एकमात्र ऐसी नेता थीं जिन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विरोध किया था, जिसके कारण लाखों लोगों के मतदान अधिकार छीन लिए गए थे।”
उपचुनाव से पहले एसआईआर से हटाए गए दो उपचुनाव सीटों के मतदाताओं से संबंधित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “ये केवल उपचुनाव हैं।” चौधरी कहते हैं, “इस मतदान से सरकार नहीं बदलेगी। लेकिन यह अल्पसंख्यक मतदाताओं के लिए अपने मुद्दों को उजागर करने और अपना पक्ष रखने का एक मौका है।”
उन्होंने कबीर पर सांप्रदायिक राजनीति करने के मामले में बीजेपी के विपरीत पक्ष का प्रतिनिधित्व करने का भी आरोप लगाया। चौधरी के साथ आए नादिया विधायक अलीफा अहमद ने चुनाव आयोग से ममता टीएमसी को पार्टी का पुराना चिन्ह न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हालांकि, सभी जानते हैं कि टीएमसी का मतलब ममता बनर्जी है। कार्यकर्ता और मतदाता हमारे साथ हैं। बागी (टीएमसी का दूसरा गुट) बीजेपी की बी टीम हैं।”
बहरामपुर कस्बे में बीजेपी के एक कार्यालय में सरकार पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से घिरे बैठे हैं, जबकि लोग झंडे और बैनर लगाने में व्यस्त हैं। बीजेपी उम्मीदवार का कहना है कि उन्हें सभी पक्षों से समर्थन मिलने का पूरा भरोसा है। सरकार कहते हैं, “यहां कोई हिंदू-मुस्लिम या अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का भेद नहीं है। रेजिनगर के लोग, हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सभी ने तय कर लिया है कि उन्हें कॉलेज, कारखाने और पुल चाहिए और ये सब कुछ शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी सरकार ही दे सकते हैं। यह चुनाव विकास का है, सांप्रदायिक विभाजन का नहीं।”
इस क्षेत्र में एक मजबूत हिंदू वोट बैंक – बीजेपी नेता
स्थानीय बीजेपी नेता का कहना है कि इस वजह से चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “हमारे पास पहले से ही इस क्षेत्र में एक मजबूत हिंदू वोट बैंक है। अब हम घर-घर जाकर मुसलमानों से बात कर रहे हैं। अगर हम जीतते हैं, तो हमें वह उपलब्धि हासिल होगी जो हमें पहले कभी नहीं मिली–मुस्लिम वोट।”
उन्होंने स्वीकार किया कि बीजेपी इस बात पर भी भरोसा कर रही है कि अन्य सभी उम्मीदवार मुस्लिम हैं। उन्होंने कहा, “इससे मुस्लिम वोट बैंक के एकीकरण में और बाधा आएगी।” ममता टीएमसी के चौधरी के अलावा, अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों में सीपीआई (एम) के मोहम्मद सईद, कांग्रेस के अब्दुल्लाहिल काफी और बागी टीएमसी के सफ़िउज़्ज़मान शेख शामिल हैं।
50 साल के किसान अब्दुल शेख का कहना है कि वे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार के आने के बाद से हमने सब कुछ देखा है। लेकिन अब यह कुछ अलग प्रस्ताव रख रही है। देखते हैं क्या होता है।”
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एक बार फिर खुद को सभी का नेता बताने की कोशिश की और नंदीग्राम के अल्पसंख्यक मतदाताओं की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए उनसे 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के साथ एकजुट होने का आग्रह किया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
