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111 में 91 बार कांग्रेस ने लगाया राष्ट्रपति शासन! जानें किन आंकड़ों से विपक्ष को घेरेगी मोदी सरकार

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे पर विपक्ष के हमले सह रही मोदी सरकार ने संसद में विरोधियों से सीधी टक्कर लेने का फैसला किया है।

Author नई दिल्ली | April 24, 2016 20:00 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे पर विपक्ष के हमले सह रही मोदी सरकार ने संसद में विरोधियों से सीधी टक्कर लेने का फैसला किया है। संसद के सोमवार से शुरू हो रहे सत्र के हंगामेदार रहने और विपक्षी पार्टियों की ओर से मोदी सरकार पर देश के संघीय ढांचे पर ‘हमला’ होने का आरोप लगाए जाने की उम्मीद है। ऐसे में सदन में सरकारी पक्ष की व्यवस्था संभालने वालों ने कड़ाई बरतने और अतीत में सरकारों की ओर से अनुच्छेद 356 के उपयोग के विशिष्ट मामलों की मिसाल पेश कर पलट वार करने का फैसला किया है।

इसके साथ ही, सरकार उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की कार्रवाई का बचाव करेगी और कहेगी कि संवैधानिक संकट के आलोक में यह कदम उठाया गया। संसद के बाहर, भाजपा के प्रवक्ता भी यही लाइन अपनाएंगे और कहेंगे कि मतविभाजन की नौ विद्रोही कांग्रेस विधायकों की मांग को नजरअंदाज कर विनियमन विधेयक के पारित होने की घोषणा कर अनुचित व्यहवार किया गया।

सूत्रों के अनुसार सरकार यह तथ्य संसद में पेश कर सकती है-
1951 से ले कर अब तक 111 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया
कांग्रेस तथा कांग्रेस समर्थित सरकारों ने 91 बार राष्ट्रपति शासन लगाया।
इसके अलावा सरकार जवाहरलाल नेहरू से ले कर नरेन्द्र मोदी तक राष्ट्रपति शासन लगाए जाने से जुड़े आंकड़े पेश कर सकती है।

कब-कब लगा राष्ट्रपति शासन?
सरकार के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, “इंदिरा गांधी के 16 साल के शासनकाल के दोरान 45 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। मनमोहन सिंह के 10 साल के शासनकाल के दौरान यह 10 बार लगाया गया। पीवी नरसिंह राव के पांच साल से कम के शासनकाल के दौरान 11 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया जबकि नेहरू के 17 साल के शासनकाल के दौरान सात बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया।”

उन्होंने बताया कि, “राजीव गांधी के पांच साल के शासनकाल में यह छह बार लगाया गया जबकि लाल बहादुर शास्त्री के एक साल 216 दिन के शासनकाल के दौरान दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया।” सूत्रों ने मुताबिक, “जहां जनता पार्टी की मोरारजी देसाई सरकार के दो साल 126 दिन के संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान यह 12 बार लगाया गया, वीपी सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के 340 दिन के कार्यकाल के दौरान यह दो बार लगाया गया।”

जदयू और वामपंथी पार्टियों जैसी विपक्षी पार्टियां भी उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमले कर रही हैं। ऐसे में सरकार ने उन्हें यह याद दिलाने की योजना बनाई है कि जनता पार्टी और संयुक्त मोर्चा की सरकारों ने भी अनेक राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया था।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस समर्थित चौधरी चरण सिंह के 170 दिन के शासनकाल और कांग्रेस के ही समर्थन वाली चंद्रशेखर की समाजवादी जनता पार्टी सरकार के 223 दिन के कार्यकाल के दौरान चार-चार बार राष्ट्रपति शासन लगाए गए। कांग्रेस समर्थित एचडी देवेगौडा सरकार के 324 दिन के कार्यकाल के दौरान दो बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

उम्मीद की जा रही है कि सरकार यह दलील देगी कि अटल बिहारी वाजपेयी के छह साल के शासनकाल के दौरान सिर्फ छह बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया जबकि नरेन्द्र मोदी सरकार के पिछले दो साल के कार्यकाल के दौरान सिर्फ दो बार इसे लगाया गया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेताओं ने प्रश्नकाल निलंबित करने और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित करने के लिए नोटिस दिए हैं।

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