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ताजमहल की खूबसूरती पर फिदा हुए थे बिल क्लिंटन

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के ताज के दीदार के गवाह रहे उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन वजीर अशोक यादव बताते हैं कि उनके दौरे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि दुनिया भर के लोगों में ताज के दीदार की चाहत बढ़ी और पर्यटकों की लाइन लग गई।

आज से 20 साल पहले जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ताज देखने आए, तो इसकी खूबसूरती पर फिदा हो गए थे।

हिंदुस्तान के मुगल शहंशाहों से में से एक शाहजहां की मोहब्बत को बयान करता आगरा का ताजमहल दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिल में हिंदुस्तान के प्रति मोहब्बत जगा पाएगा या नहीं, यह तो वक्त तय करेगा लेकिन आज से 20 साल पहले जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ताज देखने आए, तो इसकी खूबसूरती पर फिदा हो गए थे। चांदनी रात में दूधिया संगमरमर की चमक उनकी आंखों में कुछ यूं बस गई कि इश्क की इस बेनजीर बानगी को देखकर उन्होंने कहा था-दुनिया में दो तरह के लोग हैं। एक मेरी तरह के जिन्होंने ताज को देखा है और दूसरे वे जिन्होंने ताज को नहीं देखा है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के ताज के दीदार के गवाह रहे उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन वजीर अशोक यादव बताते हैं कि उनके दौरे का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि दुनिया भर के लोगों में ताज के दीदार की चाहत बढ़ी और पर्यटकों की लाइन लग गई। सरकार का खजाना भरने में कोई कसर बाकी नहीं रही। बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक आगरा आए और ताज को देखा। उन्होंने बताया कि क्लिंटन की यात्रा से पहले रात में ताज के दीदार पर पाबंदी लग गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट से आग्रह कर यह सुविधा दोबारा चालू कराई गई क्योंकि चांदनी रात में आंखों को मोहित कर देने वाली चमक बिखेरते ताज को देखना अपने आप में एक अलग आनंद देता है और पर्यटकों को यह नजारा लाजिमी तौर पर बेहद भाता है।

यादव बताते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के प्रबंध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसमान में आठ हेलिकॉप्टर और धरती पर 2200 जवान तैनात थे। अमेरिकन सुरक्षा एजंसियां इतनी सख्त थीं कि जैड सुरक्षा हासिल होने के बावजूद मुझे खुद भी कई बार इंतजाम देखने के लिए पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ती थी और कई बार सुरक्षा अधिकारियों से उलझना भी पड़ता था। उन्होंने कहा कि जिस दिन क्लिंटन को आना था, उस दिन उनके स्वागत के लिए मैं अपने जहाज से चार घंटे पहले आगरा पहुंचा। लेकिन सुरक्षा एजंसियों को इस पर भी एतराज था।

उनके ख्याल में उमुझे और पहले पहुंच जाना चाहिए था। क्लिंटन और उनकी बेटी चेलसा के ताज दौरे के दौरान उनके साथ रहे यादव ने कहा कि एक ओर तरफ इतना सख्त पहरा और दूसरी तरफ इतना नर्म और मोम सा पिघला देने वाली क्लिंटन की शख्सियत। उनका कोई सानी नहीं थे। वे बेहद अच्छा वक्ता तो थे ही एक अतिथि के तौर पर भी उनका व्यवहार आप भुला नहीं सकते।

यादव ने उम्मीद जताई कि बिल क्लिंटन की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप का दौरा भी हमारे देश के लिए बेहद मुफीद साबित होगा और जहां तक ताजमहल का ताल्लुक है, तो निश्चित रूप से विदेशी पर्यटकों की संख्या में इजाफा करने वाला साबित होगा। अलबत्ता, यह बात जरूर है कि जब क्लिंटन आए थे, तब हम पर बहुत दबाव में थे, अब शायद वैसा दबाव नहीं हो क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में दुनिया में भारत का रुतबा बहुत बुलंद हुआ है।

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