ताज़ा खबर
 

नमामि गंगे परियोजना शुरू, केंद्र उठाएगा पूरा खर्च

गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना नए ढांचागत व वित्तीय व्यवस्था के तहत शुरू की गई है। तीन चरणों में पूरी की जाने वाली इस परियोजना का पूरा खर्च अब केंद्र सरकार वहन करेगी..

गंगा घाट का एक नजारा (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।)

गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना नए ढांचागत व वित्तीय व्यवस्था के तहत शुरू की गई है। तीन चरणों में पूरी की जाने वाली इस परियोजना का पूरा खर्च अब केंद्र सरकार वहन करेगी। जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इस परियोजना की शुरुआत अनूपशहर से हो गई है। पहले केंद्र और राज्य के बीच खर्च का बंटवारा 75-25 के अनुपात में होने की बात कही गई थी। बाद में इसमें बदलाव किया गया और अब सौ फीसद खर्च केंद्र वहन करेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण को एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है जिसमें गंगा नदी की अविरलता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

केंद्र में भाजपा नीत राजग शासन के 18 महीने गुजरने के बाद भी सरकार की इस महत्त्वपूर्ण परियोजना के उत्साहजन परिणाम सामने नहीं आए हैं। वित्त पोषण के स्वरूप में बदलाव आने से भी परियोजना को आगे बढ़ाने के काम में देरी हुई है। ऐसे में अब इसे तेजी से आगे बढ़ाने की पहल की जा रही है। गंगा नदी के किनारे स्थित करीब 118 शहरों से रोजाना निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अवशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषकों के कारण नदी की धारा को निर्मल बनाना बहुत बड़ी चुनौती है।

इस विषय पर सरकार ने कहा है कि वह इन क्षेत्रों में उद्योगों से गंगा में आने वाले प्रवाह के आसपास आधुनिक प्रौद्योगिकी युक्त ऐसे यंत्र लगाने जा रही है जिससे 15 मिनट से ज्यादा प्रदूषण फैलने पर उक्त उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। गंगा में प्रदूषण पर निगरानी रखने के लिए ‘गंगा कार्य बल’ के गठन के काम को आगे बढ़ाया गया है जिसमें पूर्व सैनिकों व अन्य लोगों को शामिल किया जा रहा है। ये गंगा नदी के सौ मीटर के दायरे में हर तरह के प्रदूषण पर नजर रखेंगे और उसे रोकने का काम करेंगे। कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में इस पहल को सबसे पहले आगे बढ़ाया जा रहा है। वन व पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नदी के किनारे स्थित उद्योगों से निकलने वाले प्रवाह को हम 24 घंटे चलने वाले प्रदूषण निगरानी उपकरण से जोड़ने का काम आगे बढ़ा रहे हैं। यह नई प्रौद्योगिकी पर आधारित है और कई तरह की श्रेणियों में है।

नमामि गंगे के तहत पीपीपी मॉडल की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नामामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत मिश्रित वार्षिक वेतन आधारित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) शुरू करने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य भारत में अपशिष्ट जल क्षेत्र में सुधार करना और शोधित जल के लिए बाजार विकसित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मिश्रित वेतन आधारित सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाए जाने को मंजूरी दी गई। इससे कार्य प्रदर्शन, सक्षमता, व्यावहारिकता व निरंतरता सुनिश्चित हो सकेगी।

इस मॉडल में पूंजीगत निवेश के एक हिस्से 40 फीसद तक का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा और शेष भुगतान वार्षिक के रूप में 20 वर्षों तक किया जाएगा। इस मॉडल के विशेष स्वभाव को ध्यान में रखते हुए और भविष्य में इसे बेहतर बनाने के लिए सरकार पीपीपी परियोजनाओं की योजना, संरचना व कार्यान्वयन निगरानी के लिए विशेष कंपनी (एसपीवी) स्थापित करेगी।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के समग्र दिशा-निर्देश के अंतर्गत समुचित नीति के माध्यम से शोधित अपशिष्ट जल के लिए बाजार विकसित किया जाएगा। एसपीवी की स्थापना भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत की जाएगी और इसके माध्यम से आवश्यक शासन संरचना और कामकाजी स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। एसपीवी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए इसमें भाग लेने वाली राज्य सरकारों व शहरी निकायों के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया जाएगा। इस त्रिपक्षीय समझौते का उद्देश्य सुधार लागू करना व प्रदूषक भुगतान आधार पर उपयोग शुल्क की वसूली के लिए नियामक कदम उठाना है।

मंत्रालय ने एसटीपी से स्वच्छ किए गए जल की खरीदारी के लिए रेल मंत्रालय के साथ समझौता किया है ताकि शोधित अपशिष्ट जल के लिए तेजी से बाजार विकसित किया जा सके। इसी तरह के समझौते विद्युत, पेट्रोलियम व उद्योग मंत्रालय के साथ किए जाएंगे। सरकार द्वारा यह भविष्य के लिए उठाया गया कदम है जिसमें शोधित जल के लिए बाजार विकसित किया जाएगा और संरचनात्मक सुधार परियोजनाओं के पूरक होंगे। इससे नामामि गंगे के कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए सामान आबंटन के साथ अनेक परियोजनाएं शुरू की जा सकेंगी। साथ ही प्रारंभिक वर्षों में वित्तीय दायित्व में कमी आएगी।

संपूर्ण रियायत अवधि में निजी भागीदार के हिस्से को फैलाने से दीर्घकालिक रूप में संचालन सुनिश्चित होगा। कार्य प्रदर्शन मानकों को वार्षिक भुगतान के साथ जोड़ने से समुचित मानक वाले शोधित जल का उद्देश्य सुनिश्चित होगा। यह शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता सृजन में सहायक होगा क्योंकि प्रदूषक भुगतान आधार पर उपयोग शुल्क की वसूली का आधार स्थापित हो जाएगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories