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आज़ादी के बाद से ही अलहदगी महसूस कर रहा मुसलमान: नज़मा

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने इस बात को खारिज किया है कि भाजपा के नेतृत्व वाले शासन के दौरान मुसलिम असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि यह...

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने इस बात को खारिज किया है कि भाजपा के नेतृत्व वाले शासन के दौरान मुसलिम असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि यह समुदाय तो आजादी के बाद से ही अलग-थलग महसूस कर रहा है और इसकी वजह कांग्रेस सरकारों की नीतियां हैं। नजमा ने कहा कि मुसलिम अलग-थलग हैं क्योंकि वे आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। अब लोग कह रहे हैं कि (मुसलिमों के खिलाफ) दिए जा रहे बयान उन्हें अलग-थलग महसूस करवा रहे हैं।

नजमा ने एक समाचार एजंसी से कहा कि ऐसा नहीं है कि मुसलिम आज अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। वे तो आजादी के बाद से अलग-थलग महसूस करते आए हैं क्योंकि उन्हें इतनी पिछड़ी स्थिति में भेज दिया गया। नजमा दरअसल इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या दक्षिण पंथी तत्त्वों की आपत्तिजनक टिप्पणियां और घृणित भाषण मोदी सरकार के शासनकाल में मुसलिम समुदाय को अलग-थलग कर रहे हैं? उन्होंने जवाब में कहा कि वे तो पहले ही अलग-थलग थे। वे पिछड़ी स्थिति में भेज दिए गए थे क्योंकि वे शैक्षणिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग थे। और सामाजिक तौर पर अलग-थलग हो जाना इससे जुड़ा हुआ है। यहां से पूरी स्थिति की शुरुआत हुई। किसी के कुछ बयान देने भर से आप अलग-थलग महसूस नहीं करते।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए नजमा ने कहा कि जिस पार्टी ने आज तक 1984 के सिख-विरोधी दंगों की जिम्मेदारी नहीं ली है, वह अल्पसंख्यकों के हितों की बात कर रही है। 2004 में कांग्रेस छोड़ चुकी नजमा ने कहा कि उनके शासनकाल के दौरान सिखों का कत्लेआम हुआ। वह एक जनसंहार था। क्या उन्होंने कोई जिम्मेदारी ली? आज भी लोग अस्थाई शिविरों में रह रहे हैं और वे अल्पसंख्यकों की बात कर रहे हैं। मुसलिमों के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता बताने के लिए उन्होंने युद्ध प्रभावित यमन में फंसे भारतीयों को हाल ही में निकाले जाने के अभियान का संदर्भ दिया। वहां से निकाले गए लोगों में ज्यादातर लोग मुसलिम थे।

नजमा ने कहा कि आज ज्यादा मुसलिम सरकारी सेवा में नहीं हैं। यह भाजपा ने नहीं किया। संघ ने नहीं किया। सरकार में तो कांग्रेस थी। वे इसके लिए जिम्मेदार हैं। मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय को किए जाने वाले बजट आबंटन में इस साल कटौती नहीं की गई। बल्कि राज्यों को दस फीसद अतिरिक्त हस्तांतरण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास व वित्त निगम की अधिकृत शेयर पूंजी को 1500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव भी इस साल फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया। पिछली यूपीए सरकार ऐसा करने में विफल रही थी।

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