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नगालैंड: मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ीं, NSCN-IM ने कहा- अलग ध्वज और संविधान बिना केंद्र से समझौता नहीं

एनएससीएन-आईएम का कहना है कि बिना अलग झंडे और संविधान के भारत की केंद्र सरकार के साथ शांति समझौते का सम्मानजनक समाधान नहीं निकलेगा।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 19, 2020 12:10 PM
NSCN-IM,Indo-Naga political talks, naga peace talkएनएससीएन-आईएम अलग ध्वज और संविधान की मांग पर अड़ गया है। (Photo-DASARATH DEKA)

नागालैंड का सबसे सशस्त्र विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड- इसाक-मुइवा) ने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एनएससीएन-आईएम ने अलग ध्वज और संविधान की मांग की है। जिसके चलते नागा शांति वार्ता में एक बार फिर अड़चनें आती दिखाई दे रही हैं।

एनएससीएन-आईएम का कहना है कि बिना अलग झंडे और संविधान के भारत की केंद्र सरकार के साथ शांति समझौते का सम्मानजनक समाधान नहीं निकलेगा। एनएससीएन-आईएम की एक संयुक्त परिषद की बैठक शुक्रवार को हुई, जिसमें “नागा लोगों के ऐतिहासिक और राजनीतिक अधिकारों” और “भारत-नागा राजनीतिक वार्ता” कैसे मुकाम पर पहुंचे, इस पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक नागालैंड में दीमापुर के पास हेब्रोन में केंद्रीय मुख्यालय में आयोजित की गई थी।

एनएससीएन-आईएम का ये कठोर रुख ऐसे समय में आया है जब नागालैंड के राज्यपाल और वार्ताकार आरएन रवि के बीच मतभेदों के कारण शांति वार्ता गतिरोध का सामना कर रही है। एनएससीएन-आईएम ने एक प्रेस रिलीज भी जारी की है। संगठन ने अपने बयान में कहा कि सभा ने सर्वसम्मित से इस प्रस्ताव को पारित किया है, जो एनएससीएन-आईएम के कथन को दोहराता है।

रिलीज में यह भी कहा गया है कि केंद्र और एनएससीएन-आईएम को 3 अगस्त, 2015 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक फ्रेमवर्क समझौते के आधार पर ही “अंतिम समझौते” की तलाश करनी चाहिए। विद्रोह समूह चाहता है कि नागा राष्ट्रीय झंडा और संविधान, भारत-नागा राजनैतिक समाधानों का हिस्सा जरूर बनें और सौदे को सम्मानजनक और स्वीकार्य के रूप में योग्य बनाएं।

पिछले महीने एनएससीएन-आईएम ने दावा किया था कि केंद्र ने नागा लोगों की संप्रभुता को मान्यता दी थी। साल 2015 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें इस बात पर सहमति जताई गई थी कि नागा लोग सह-अस्तित्व में रहेंगे लेकिन भारत में विलय नहीं करेंगे।

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