केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार आने वाले दिनों में एक ऐतिहासिक फैसला लेने वाली है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने जा रही है। इस पर चर्चा करने के लिए लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जो16 अप्रैल से शुरू होगा और 18 तक चलेगा। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो जाएगी।

अधिनियम के पारित होने के बाद लोकसभा में 33 फीसदी महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस योजना के तहत सरकार का इरादा 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन (सीमा-निर्धारण) करने के बाद लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 तक ले जाने का है। ये 50 फीसदी की वृद्धि है और इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। जून 2024 में गठित 18वीं लोकसभा में कुल 74 महिला सदस्य (सांसद) चुनकर आई हैं।

महिलाओं को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे इस फैसले की काफी चर्चा हो रही। सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा तारीफ से लेकर विपक्ष की आलोचना तक। नारी शक्ति वंदन अधिनियम फिलहाल चर्चा के केंद्र में है। सरकार का कहना है कि इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे आधी आबादी का विकास और तेजी से होगा। हालांकि, इस बीच एक सवाल उठाता है कि जैसे उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की तैयारी है, वैसे ही क्या उनके अधिकारों को भी बढ़ाया जाएगा। क्या पीरियड लीव पर भी नीतियां बदलेंगी।

दरअसल, ऐसे समय में जब हम महिलाओं की प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में उनकी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के बारे में भी बात करना जरूरी है। मासिक धर्म के दौरान कामकाजी महिलाओं को आधिकारिक अवकाश देने की मांग लंबे से उठ रही है। इस पर बातें और चर्चा भी खूब होती है। लेकिन इस संबंध में कोई राष्ट्रव्यापी कानून या नीति नहीं है।

देश में पीरियड (मासिक धर्म) के दौरान छुट्टी को लेकर अभी तक कोई राष्ट्रीय स्तर का कानून लागू नहीं है। पूरे देश में सभी महिलाओं के लिए यह सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर ऐसी नीतियां लागू की हैं।

बिहार इस मामले में सबसे आगे माना जाता है, जहां 1992 से ही सरकारी महिला कर्मचारियों को हर महीने दो दिन की विशेष छुट्टी दी जाती है। इसके अलावा कर्नाटक ने हाल के वर्षों में एक व्यापक नीति लागू की है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को साल में लगभग 12 दिन की पीरियड लीव देने की व्यवस्था की गई है।

ओडिशा में भी महिला सरकारी कर्मचारियों को हर महीने एक दिन की मासिक धर्म अवकाश मिलता है। वहीं, केरल में यह सुविधा मुख्य रूप से छात्राओं के लिए लागू की गई है, जहां उन्हें पीरियड के दौरान छुट्टी और उपस्थिति में छूट दी जाती है। सिक्किम में भी कुछ संस्थानों में इस तरह की छुट्टी का प्रावधान है। कुल मिलाकर, भारत में पीरियड लीव की व्यवस्था अभी सीमित स्तर पर ही लागू है और इसे पूरे देश में लागू करने को लेकर अभी चर्चा जारी है।

देश में पीरियड लीव को लेकर सिर्फ राज्यों की नीतियां ही नहीं, बल्कि कानून, कंपनियों और समाज स्तर पर भी काफी चर्चा चल रही है। हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार ने इसे अनिवार्य कानून बनाने से इनकार किया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि यह एक पॉलिसी मैटर है, जिसे सरकार तय करेगी। कोर्ट का मानना है कि इसे अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर भी पड़ सकता है, क्योंकि कुछ नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने में हिचक सकते हैं।

रिपोर्ट्स की मानें को कई निजी कंपनियां अपने स्तर पर यह सुविधा दे रही हैं। जैसे जोमैटो ने साल में 10 दिन की पीरियड लीव की घोषणा की थी। वहीं स्विगी और बायजूज जैसी कंपनियों ने भी अपने महिला कर्मचारियों के लिए ऐसी नीतियां लागू की हैं। इससे यह साफ है कि कॉर्पोरेट सेक्टर इस दिशा में सरकार से थोड़ा आगे चल रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो जपान, साउथ कोरिया और स्पेन जैसे देशों में पीरियड लीव को कानूनी मान्यता दी जा चुकी है। खासतौर पर स्पेन ने 2023 में इसे कानून बनाकर महिलाओं को मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर छुट्टी का अधिकार दिया।

भारत में इस विषय पर बहस दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक पक्ष मानता है कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि इससे कार्यस्थल पर लैंगिक समानता प्रभावित हो सकती है। इसलिए अभी तक इसका कोई एक समान समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन धीरे-धीरे जागरूकता और स्वीकार्यता जरूर बढ़ रही है।

चूंकि, देश अब एक ऐतिहासिक फैसले की ओर बढ़ रहा है, महिलाओं के हित और विकास की प्राथमिकता से बात की जा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही इस ओर भी सकारात्मक पहल किए जाएंगे।

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नई दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को समर्पित एक बड़े ऐतिहासिक फैसले का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि देश 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक लेने जा रहा है जो नारी शक्ति को समर्पित होगा और भारत के भविष्य को नई दिशा देगा। अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को बैसाखी और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही जलियावालां बाग के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा के इस अहम पड़ाव पर लिया जाने वाला निर्णय महिलाओं की भागीदारी को सशक्त करेगा और लोकतंत्र को नई मजबूती देगा। पूरी खबर पढ़ें…