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एन राम, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने कोर्ट की अवमानना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका, वैधता को दी चुनौती

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिनियम असंवैधानिक है और संविधान की मूल संरचना के खिलाफ है। एन राम, अरुण शौरी और भूषण के अनुसार ये संविधान द्वारा प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

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वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण के खिलाफ शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही को वरिष्ठ पत्रकार एन राम, अरुण शौरी और भूषण ने चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिनियम असंवैधानिक है और संविधान की मूल संरचना के खिलाफ है। एन राम, अरुण शौरी और भूषण के अनुसार ये संविधान द्वारा प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

याचिकाकर्ताओं ने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट की धारा 2 (सी) (आई) को चुनौती दी है। अर्जी में कहा गया है कि कोर्ट के सम्मान को गिराने वाले बयान पर लगने वाली ये धारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट अदालत की अवमानना अधिनियम 1971 के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दे। याचिका में तर्क दिया गया है कि लागू उप-धारा असंवैधानिक है क्योंकि यह संविधान के प्रस्तावना मूल्यों और बुनियादी विशेषताओं के साथ असंगत है।

एन राम, अरुण शौरी और भूषण द्वारा दायर की गई याचिका में अदालत की अवमानना धारा 2 (सी) (आई) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 और 14 का उल्लंघन करती है।

सुप्रीम कोर्ट के सात रिटायर्ड जज और हाईकोर्ट के 2 रिटायर्ड जजों सहित 131 हस्तियों ने भूषण के खिलाफ शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्व‍िट्स करने के आरोप में 22 जुलाई को अवमानना की कार्यवाही को लेकर नोटिस जारी किया था।

जस्टिस रूमा पाल, जी.एस.सिंघवी, ए.के. गांगुली, गोपाला गौड़ा, आफताब आलम, जस्ती चेलमेश्वर और विक्रमजीत सेन ने अवमानना की कार्यवाही वापस लेने का आह्वान किया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों के अलावा हाईकोर्ट के भी 2 पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अंजना प्रकाश और जस्टिस एपी शाह भी प्रशांत भूषण के समर्थन में आए हैं।

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