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भारत में घुसे म्यांमार के 19 पुलिसवाले, और के आने की आशंका

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग के आदेश दे रही सेना, इन्हीं आदेशों को न मानने वाले अधिकतर पुलिसकर्मियों ने पार किया म्यांमार-भारत बॉर्डर।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 5, 2021 8:04 AM
Myanmar, Police, Mizoramम्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद आम लोगों के प्रदर्शनों को रोकने के लिए खड़े पुलिसकर्मी। (फोटो- AP)

म्यामांर में सेना द्वारा आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिये जाने के बाद करीब एक महीने के दौरान वहां से कम से कम 19 पुलिस अफसर ने भारतीय सीमा पार करके मिजोरम में शरण ले चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह अफसर म्यांमार की सेना (जुंता) के आदेशों से बचने के लिए भारत सीमा पार कर गए। बता दें कि म्यांमार की सेना पर काफी समय से बल के जरिए देश में चल रहे प्रदर्शनों को कुचलने के आरोप लग रहे हैं।

एक भारतीय पुलिस अधिकारी के मुताबिक, बॉर्डर पार कर भारत आए ज्यादातर लोग मिजोरम के चंफई और सर्छिप जिले में दाखिल हुए। गौरतलब है कि मिजोरम की सीमा म्यांमार से ही लगती है। अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर पार करने वाले निचली रैंक के पुलिसकर्मी थे और किसी के पास भी हथियार नहीं थे। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी म्यांमार से कई और पुलिस अधिकारियों के भारत आने की आशंका है।

फिलहाल जो शरणार्थी भारतीय सीमा के पार आ चुके हैं, उनकी पहचान की जानी अभी बाकी है। सर्छिप के उपायुक्त कुमार अभिषेक ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि एक ही परिवार के कुछ सदस्यों समेत पांच लोग गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय सीमापार करके जिले में दाखिल हुए जबकि तीन अन्य ने तीन मार्च को ऐसा किया।

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को फिलहाल लुंगकावह में सामुदायिक सभागार में रखा गया है। जिला प्रशासन उन्हें भोजन उपलब्ध करवा रहा है। चंफाई की उपायुक्त मारिया सी टी जुआली ने बताया कि हाल ही में म्यामांर से लोग जिले में आए हैं। उपायुक्त ने बताया कि हाल ही में म्यांमार से 100 से अधिक लोग मिजोरम में शरण लेने के लिए सीमा पार करने का प्रयास किया लेकिन असम राइफल्स ने उन्हें रोक दिया।

म्यांमार से क्यों भाग रहे पुलिसकर्मी?: बता दें कि म्यांमार में पिछले महीने ही सेना ने सैन्य तख्तापलट को अंजाम दिया था और आंग सान सू की की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके खिलाफ विरोध में उतरे प्रदर्शनकारियों पर भी सेना ने कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को ही म्यांमार के सुरक्षा बलों ने कम से कम 33 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी। एक फरवरी को हुए तख्तापलट के बाद से एक दिन में जान गंवाने वालों की यह सर्वाधिक संख्या है। बताया जा रहा है कि सेना के प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता के इन्हीं आदेशों के चलते पुलिसकर्मी बॉर्डर पार कर भारत में घुस रहे हैं।

अमेरिका ने जताया दुख: अमेरिका ने बुधवार को कहा कि असैन्य शासन को बहाल करने की शांतिपूर्ण तरीके से मांग कर रहे म्यांमार के लोगों के प्रति बरती जा रही भयावह हिंसा को देखकर वह स्तब्ध है और बहुत ही दुखी है। विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइज ने कहा, ‘‘हम सभी देशों का आह्वान करते हैं कि म्यांमार की सेना द्वारा अपने ही लोगों के खिलाफ की जा रही बर्बर हिंसा की वे एक होकर निंदा करें और सेना की कार्रवाई पर जवाबदेही की मांग करें जिसके कारण बर्मा में अनेक लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है।’’

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