केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार तीन सीटों पर जीत हासिल की है। भाजपा के तीन निर्वाचित विधायकों में से चथन्नूर विधायक बी बी गोपाकुमार को भाजपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। गोपाकुमार, राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन जैसे दिग्गजों से आगे पार्टी की पसंद बनकर उभरे, जो दोनों पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और क्रमशः नेमोम और कझाक्कूट्टम से निर्वाचित हुए थे।

हालांकि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित हुए दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका था और विधानसभा ने अंतरिम रूप से अपने स्पीकर का चुनाव भी कर लिया था। भाजपा ने बुधवार को ही अपने विधायक दल के नेता की घोषणा की। नई विधानसभा के पहले सत्र से ठीक पहले, जो शुक्रवार को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के अभिभाषण के साथ शुरू होने वाला है।

गोपाकुमार ने कहा कि मेरे चयन ने मुझे चौंका दिया। मुझे इसकी जानकारी तभी हुई जब चंद्रशेखर (जो राज्य भाजपा अध्यक्ष भी हैं) ने मुझे बताया। मैं केरल विधानसभा में भाजपा की आवाज़ बनूंगा। यह मेरे लिए बड़ा सम्मान है।

हालिया चुनावों में वामपंथ के गढ़ चथन्नूर से 4,000 से ज्यादा वोटों से जीतने वाले गोपाकुमार, 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के डार्क हॉर्स उम्मीदवारों में से एक थे। पिछले सप्ताह उन्होंने विधानसभा स्पीकर पद की दौड़ में भी अपना नाम डाला था। एक सेवानिवृत्त स्कूल प्रधानाध्यापक, गोपाकुमार एक दशक पहले भाजपा के ‘मिस्ड कॉल’ सदस्यता अभियान के जरिए पार्टी में शामिल हुए थे।

चथन्नूर, जिसे 2006 से लगातार सीपीआई ने जीता था, उन सीटों में शामिल था जहां आरएसएस कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर तैनात किया गया था, जिससे गोपाकुमार की अप्रत्याशित जीत हुई। गोपाकुमार को हिंदू एझवा समुदाय के प्रमुख चेहरे के रूप में भी समर्थन मिला, जो निर्वाचन क्षेत्र के लगभग 45% मतदाताओं का हिस्सा है। एझवा समुदाय की श्री नारायण धर्म परिपालना (एसएनडीपी) योगम और नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) की भी इस सीट पर मजबूत पकड़ है।

2016 के विधानसभा चुनाव में जब गोपाकुमार ने चथन्नूर से चुनाव लड़ा था, तब भाजपा केवल 24.92% वोट शेयर हासिल कर पाई थी। 2021 में फिर से चथन्नूर से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने भाजपा का वोट शेयर बढ़ाकर 30.61% कर दिया। 2026 में, गोपाकुमार ने सीपीआई के आर राजेंद्रन को हराया और 38.54% वोट हासिल किए। गोपाकुमार, जो पहले भाजपा कोल्लम जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, पिछले एक दशक से निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय बने हुए थे।

गोपाकुमार ने कहा कि चथन्नूर मॉडल को केरल की सभी सीटों पर दोहराया जा सकता है, जहां विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में भाजपा की हिस्सेदारी बढ़ी है।

भाजपा सूत्रों ने कहा कि गोपाकुमार को विधायक दल का नेता बनाया जाना पार्टी मामलों में आरएसएस के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जाना चाहिए। 2016 में गोपाकुमार को आरएसएस के समर्थन से विधानसभा चुनाव में उतारा गया था। हालिया विधानसभा चुनावों में भी, आरएसएस ने उनके चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सूत्रों ने कहा कि संगठन ऐसे नेता को मान्यता देना चाहता था जो संगठन के भीतर से ऊपर आया हो।

केरल भाजपा के तीन विधायकों में गोपाकुमार को भाजपा के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह कदम पार्टी को राज्य में मजबूत करने और उसका ध्यान कोल्लम जिले की ओर मोड़ने में मदद करेगा, जहां चथन्नूर स्थित है। दिसंबर में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव जीतने और तिरुवनंतपुरम जिले में दो अन्य विधानसभा सीटें- नेमोम और कझाक्कूट्टम जीतने के बाद, भाजपा अब पड़ोसी कोल्लम जिले में अपना प्रभाव बढ़ाने का लक्ष्य बना रही है।

केरल के एक भाजपा नेता ने कहा कि ये जीतें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये सभी वामपंथी गढ़ वाली सीटें थीं। कोल्लम एक और वामपंथी गढ़ है। यह संकेत देते हुए कि पार्टी अब उन क्षेत्रों में आधार मजबूत करने पर ध्यान देगी जहां परंपरागत रूप से वामपंथ का दबदबा रहा है।

अल्पसंख्यकों तक पहुंच बनाने को लेकर भाजपा की उत्सुकता के बीच, चुनाव के बाद मुरलीधरन के मुसलमानों को निशाना बनाने वाले सार्वजनिक बयान राज्य नेताओं को पसंद नहीं आए। मुरलीधरन ने बार-बार कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। एक सूत्र ने कहा कि गोपाकुमार ऐसा क्लासिक उदाहरण हैं जिसे पार्टी अन्य कार्यकर्ताओं के सामने पेश कर सकती है। वह ऐसे व्यक्ति हैं जो राजनीति में संगठन की पंक्तियों से ऊपर उठकर आए हैं।

19% बुज़ुर्ग आबादी, 20% वोटर सीनियर सिटीजन: केरल में क्यों बन रहा वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मंत्रालय | Explained

केरल अब उस भारत की तस्वीर बनता जा रहा है जिसकी कल्पना अभी बाकी देश ने पूरी तरह की भी नहीं है। यहां बुज़ुर्ग सिर्फ ‘परिवार की जिम्मेदारी’ नहीं रहे बल्कि सरकार की नीति और राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। राज्य की कांग्रेस सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मंत्रालय बनाने की पहल की है। यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग माना जा रहा है। मौजूदा समय में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कार्य राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आते हैं। पढ़ें पूरी खबर।