केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की विधायक फातिमा तहिलिया द्वारा एक कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित (कन्नड़ में निलाविलक्कु) करने को लेकर उठे विवाद के बीच समस्त केरल जमीयतुल उलेमा ने इस मुद्दे पर फतवा (धार्मिक राय) जारी किया है। केरल में सुन्नी-शाफई इस्लामी विद्वानों की प्रमुख संगठन ने कहा है कि मुसलमानों को अन्य धर्मों के धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं में भाग लेने से बचना चाहिए।
पेराम्ब्रा से विधायक फातिमा तहिलिया जो केरल विधानसभा में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की पहली महिला विधायक हैं, उन्होंने हाल ही में अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक नए रेस्तरां के उद्घाटन के दौरान दीप प्रज्वलित किया था। इसके बाद मुस्लिम समाज और राजनीतिक हलकों में इस बात पर बहस शुरू हो गई कि क्या किसी मुस्लिम जनप्रतिनिधि को ऐसे धार्मिक प्रतीकात्मक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए।
3 जून को जारी एक बयान में समस्त की केंद्रीय मशवरा समिति ने कहा कि निलाविलक्कु जलाना लंबे समय से गैर-मुस्लिम समुदायों द्वारा एक विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान के रूप में किया जाता रहा है। इसलिए मुसलमानों को ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि सामाजिक सौहार्द और साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखना भी जरूरी है।
इस्लाम में दूसरे धर्मों के अनुष्ठानों की मनाही
समस्त के वरिष्ठ नेता अब्दुल हमीद फैजी अंबालक्कडावु ने शुक्रवार को फेसबुक पोस्ट के माध्यम से संगठन का पक्ष दोहराया। उन्होंने कहा कि इस्लाम अपने अनुयायियों को अन्य धर्मों के लोगों के प्रति मित्रता, सहिष्णुता और सद्भाव रखने की शिक्षा देता है।
उन्होंने कहा, “पैगंबर के साथियों का यह निर्देश था कि जब घर में बकरी का मांस पकाया जाए तो उसका पहला हिस्सा यहूदी पड़ोसी को दिया जाए। लेकिन इस्लाम अन्य धर्मों के धार्मिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को अपनाने या उनका पालन करने पर स्पष्ट रोक लगाता है।”
फैजी ने कहा कि बहुधार्मिक समाज में ऐसे मुद्दे अक्सर विवाद का कारण बनते हैं। कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि वे संबंधित धार्मिक मान्यताओं को नहीं मानते, इसलिए ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन इस विषय पर मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले इस्लामी विद्वानों के सर्वोच्च निकाय ने स्पष्ट धार्मिक निर्णय दिया है।
निलाविलक्कु जलाने पर क्या कहा गया?
समस्त की केंद्रीय मशवरा समिति ने कहा कि अगर कोई मुसलमान निलाविलक्कु जलाने जैसे अनुष्ठान को उन धार्मिक मान्यताओं के साथ स्वीकार करता है, जिन पर यह परंपरा आधारित है और जो इस्लामी शिक्षाओं के विपरीत हैं, तो यह इस्लाम से बाहर जाने जैसा माना जाएगा।
वहीं, अगर कोई व्यक्ति उन मान्यताओं को स्वीकार किए बिना केवल गैर-मुस्लिमों की नकल करते हुए ऐसा करता है, तो यह कार्य इस्लाम में निषिद्ध (हराम) और पाप माना जाएगा। हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निलाविलक्कु का उपयोग केवल प्रकाश के साधन के रूप में किया जाए, जैसा कि किसी अन्य दीपक का किया जाता है, तो इसमें कोई धार्मिक आपत्ति नहीं है।
सौहार्द बनाए रखने की अपील
समस्त ने अपने बयान में कहा कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे ऐसे धार्मिक मामलों को हल्के में न लें और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें। निलाविलक्कु विवाद को लेकर केरल में जारी बहस के बीच समस्ता का यह बयान राज्य के मुस्लिम समाज और राजनीतिक वर्ग में नई चर्चा का विषय बन गया है।
