New Guidelines for Vande Mataram: केंद्र सरकार ने बुधवार को नए दिशानिर्देश जारी किए। इसके अनुसार सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम बजाना अनिवार्य है। इसमें कहा गया कि सभी लोगों को खड़े होकर सम्मान देना होगा, ठीक उसी तरह जैसे राष्ट्रगान जन गण मन के दौरान किया जाता है। वंदे मातरम पर जमीयत चीफ अरशद मदनी का रिएक्शन अब सामने आया है।
अरशद मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना केंद्र सरकार का न केवल एक पक्षपाती और ज़बरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है। मुसलमान किसी को वंदे मातरम् पढ़ने या उसकी धुन बजाने से नहीं रोकते, मगर क्योंकि उसकी कुछ पंक्तियां बहुदेववादी आस्था पर आधारित हैं और मातृभूमि को ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो एकेश्वरवादी धर्म की आस्था से टकराती हैं, इसलिए मुसलमान, जो केवल एक अल्लाह की वंदना करता है, उसको इसे पढ़ने पर विवश करना संविधान की धारा 25 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का खुला उल्लंघन है।”
जमीयत चीफ ने आगे लिखा, “आज इस गीत को अनिवार्य कर देना और नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल है। मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है। इस प्रकार के फैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं।”
मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करता है- अरशद मदनी
अरशद मदनी ने कहा, “याद रखिए! मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है। हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, मगर अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना कभी स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए वंदे मातरम् को अनिवार्य कर देना संविधान की आत्मा, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला है।”
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी किया विरोध
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी केंद्र की इस अधिसूचना का विरोध किया है। एआईएमपीएलबी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “केंद्र सरकार द्वारा स्कूलों और सरकारी समारोहों में वंदे मातरम के सभी श्लोकों का पाठ अनिवार्य करने वाली अधिसूचना असंवैधानिक, धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के उलट है। इस गीत में दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना का उल्लेख है, जो मुसलमानों की मान्यताओं के सीधे विपरीत है, इसलिए, यह उनके लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है। मुसलमान केवल एक ईश्वर, अल्लाह की पूजा करते हैं, जिसका कोई साझीदार नहीं है और इस्लाम ईश्वर के साथ किसी भी प्रकार के साझीदार को जोड़ने की अनुमति नहीं देता है। भारतीय न्यायालयों ने भी माना है कि गीत के कई श्लोक धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत हैं और उनके पाठ पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए, एआईएमपीएलबी मांग करता है कि केंद्र सरकार इस अधिसूचना को तत्काल वापस ले; अन्यथा, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसे न्यायालय में चुनौती देगा।”
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश
बता दें कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नया आदेश दिया है। नए आदेश के अनुसार वंदे मातरम का छह छंदों वाला, 3 मिनट और 10 सेकंड का वर्जन अब कई आधिकारिक मौकों पर बजाया या गाया जाए, जिसमें झंडोतोलन, राष्ट्रपति के कार्यक्रम, उनके भाषण और राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद, और राज्यपालों के आने और भाषणों से पहले और बाद के मौके शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
