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विरोध से परेशान मुस्लिम संस्कृत प्रोफेसर ने अब BHU के दूसरे विभागों में डाली नौकरी की अर्जी

डॉ. फिरोज खान के अपॉइंटमेंट का विरोध करने वाले एसवीडीवी के छात्रों का कहना है कि कई मौकों पर मुस्लिम प्रोफेसर सनातन धर्म और कर्मकांड के बारे में ठीक से नहीं पढ़ा पाए। वह हमारी संस्कृति से जुड़ाव नहीं कर पाते हैं।

Author वाराणसी | Published on: November 26, 2019 12:19 PM
bhu संस्कृत प्रोफेसर फिरोज खान, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की फैकल्टी संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (SVDV) में असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात किए गए डॉ. फिरोज खान ने विरोध से परेशान हो गए हैं। ऐसे में उन्होंने अब संस्कृत विभाग की आर्ट्स फैकल्टी के लिए आवेदन किया है। बता दें कि डॉ. फिरोज खान संस्कृत में पीएचडी हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी की आयुर्वेद फैकल्टी में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया है। जयपुर निवासी डॉ. खान के करीबी सूत्रों ने बताया कि यदि वह चयनित होते हैं तो एसवीडीवी फैकल्टी छोड़ देंगे। वह अब आर्ट्स फैकल्टी में पढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि एसवीडीवी के छात्रों का कहना है कि उन्हें डॉ. खान के मुस्लिम होने से कोई दिक्कत नहीं है।

डॉ. फिरोज खान के अपॉइंटमेंट का विरोध करने वाले एसवीडीवी के छात्रों का कहना है कि कई मौकों पर मुस्लिम प्रोफेसर सनातन धर्म और कर्मकांड के बारे में ठीक से नहीं पढ़ा पाए। वह हमारी संस्कृति से जुड़ाव नहीं कर पाते हैं। डॉ. खान ने 7 नवंबर को एसवीडीवी फैकल्टी जॉइन की थी, लेकिन छात्रों के प्रदर्शन के चलते अब तक एक भी क्लास नहीं कर पाए। ऐसे में पिछले सप्ताह वह छुट्टी पर चले गए और अपने घर राजस्थान लौट गए।

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बता दें कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने 22 नवंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन से यह लिखित आश्वासन मिलने के बाद धरना खत्म किया कि मैनेजमेंट उनके सभी सवालों के जवाब देगा। हालांकि, छात्रों का कहना है कि वे तब तक क्लासेज का बायकॉट जारी रखेंगे। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन उनके सवालों के जवाब देने में असफल होता है तो वे दोबारा प्रदर्शन शुरू कर देंगे।

डॉ. खान के करीबी सूत्रों ने बताया, ‘‘फिरोज खान आयुर्वेद फैकल्टी में पढ़ाने के लिए ज्यादा इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि यह विषय उनकी रुचि और खासियत से अलग है। इसके अलावा, उन्हें जिन किताबों से पढ़ाना होगा, वे पर्याप्त नहीं हैं। साथ ही, आयुर्वेद में संस्कृत साहित्य ज्यादा समृद्ध नहीं है। हालांकि, अगर वह फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में चुन लिए जाते हैं तो वह एसवीडीवी से इस्तीफा दे देंगे।’’

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