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ट्रिपल तलाक: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया सिविल कोड का विरोध, कहा- आजादी में हम भी थे, मगर गिने कम गए

ट्रिपल तलाक: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया है। बोर्ड ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा, ''इस देश के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड सही नहीं है।"
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर कोई पति एक बार में तीन तलाक बोलता है, तो अब विवाह समाप्त नहीं होगा। (Photo Source: Twitter)

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया है। बोर्ड ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा, ”इस देश के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड सही नहीं है। इस देश में बहुत सारी संस्‍कृतियां हैं, जिनकी इज्‍ज़त की जानी चाहिए। हम संविधान द्वारा किए गए समझौते के तहत इस देश में रह रहे हैं। संविधान ने ही हमें जीने और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया है। मुस्लिमों ने भी भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम में बराबरी से हिस्‍सा लिया, लेकिन उनका योगदान हमेशा कम करके आंका जाता है।” वहीं एआईएमआईएम के मुखिया असदउद्दीन ओवैसी ने कहा, ”मुझे लगता है कि फॉर्म को यूनिफॉर्म सिविल कोट के समर्थन के लिए बनाया गया है। इसे और ऑब्‍जेक्टिव और रायशुमारी वाला होना चाहिए था। हमारी पार्टी ने तय किया है कि हम प्रश्‍नावली पर विधि आयोग को जवाब देंगे।’‘ बोर्ड केन्‍द्र सरकार के कदम पर खासा नाराज है। गौरतलब है कि विधि एवं न्याय मंत्रालय ने गत शुक्रवार को देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष दायर अपने हलफनामे में लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, अंतरराष्ट्रीय समझौतों, धार्मिक व्यवहारों और विभिन्न इस्लामी देशों में वैवाहिक कानून का जिक्र किया और पर्सनल लॉ बोर्ड के पक्ष का प्रतिवाद किया। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अपने हलफनामे में लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, अंतरराष्ट्रीय समझौतों, धार्मिक व्यवहारों और विभिन्न इस्लामी देशों में वैवाहिक कानून का जिक्र किया ताकि यह बात सामने लाई जा सके कि एक साथ तीन बार तलाक की परंपरा और बहुविवाह पर शीर्ष न्यायालय द्वारा नये सिरे से फैसला किए जाने की जरूरत है।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित कुछ प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारूकी ने इस हलफनामे को लेकर कहा, ‘सरकार का इरादा महिला अधिकार नहीं, बल्कि सियासी फायदा उठाना है। बोर्ड की तरफ से सरकार को पत्र लिखा गया था कि हलफनामा दायर करने से पहले हमारा पक्ष सुना जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार ने जो हलफनामा दिया है उसमें कई त्रुटियां भी हैं।’ फारूकी ने कहा, ‘हम सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते, परंतु अगर सरकार एकतरफा फैसला करेगी तो लोगों की प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है। हम अदालत में अपना पक्ष रखेंगे और उम्मीद करते हैं कि संविधान में की गई व्यवस्था के मुताबिक पर्सनल लॉ के पक्ष में फैसला आएगा।’

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