वीडी सतीशन केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। केरल चुनाव परिणाम के दस दिन बाद कांग्रेस पार्टी ने विधायक दल के नेता के तौर पर उनके नाम का ऐलान किया। केरल के सीएम पद की रेस में उनका मुकबला केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नितला से था। हालांकि कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम पद के लिए वीडी सतीशन का चयन किया।

मुस्लिम लीग और अन्य सहयोगियों की पसंद – द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के नव नियुक्त विधायकों में से ज्यादतर की पसंद केसी वेणुगोपाल थे लेकिन राज्य में अन्य सहयोगी दलों को वीडी सतीशन पसंद थे। केरल विधानसभा चुनाव में 22 सीटें जीती मुस्लिम लीग (IUML) ने पांच सालों तक केरल में विपक्ष के नेता रहे वीडी सतीशन के साथ थी।

IUML का मानना है​ कि UDF की यह जबरदस्त जीत वीडी सतीशन के राजनीतिक रुख की पुष्टि थी। इसके अलावा केरल कांग्रेस (जोसेफ) – जिसके सात सदस्य हैं – और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) – जिसके तीन सदस्य हैं – जैसे अन्य सहयोगी भी सतीशन के समर्थन में एकजुट हो गए।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व मुस्लिम लीग के रुख को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं उठा सकता था क्योंकि IUML ही कांग्रेस के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाली मुख्य ताकत है।

2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में वायनाड से राहुल गांधी की शानदार जीत में IUML ने अहम भूमिका निभाई थी। बाद में यहीं से प्रियंका गांधी चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं। इसके अलावा कांग्रेस के लिए मुस्लिम लीग को नजर अंदाज करना इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि केरल के कई हिस्सों में IUML कांग्रेस की तुलना में जमीनी स्तर पर ज्यादा एक्टिव रहती है।

पार्टी वर्कर और सिविल सोसायटी

वीडी सतीशन को मुख्य रूप से जमीन स्तर के कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला। केरल में कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता उन्हें सीएम बनाए जाने की मांग करते हुए सड़क पर उतरे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह भावना थी कि सतीशन ने चुनाव में पार्टी के नेतृत्व किया, वहीं सीएम बनने चाहिए। सीएम पद के लिए केसी वेणुगोपाल की दावेदारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक तबके में बेचैनी पैदा कर दी। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनकी नजर किसी भी पद पर नहीं है।

विधायकों को विरोध का सामना करना पड़ा

केरल में कई विधायकों को पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि उनकी पहचान केसी वेणुगोपाल समर्थकों के तौर पर हुई। द इंंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कई विधायक जब वोटर्स का आभार जताने के लिए अपने क्षेत्र में जा रहे थे तो उन्हें विरोध क बाद अपना कार्यक्रम बीच में रोकना पड़ा या रद्द करना पड़ा। सोशल मीडिया पर भी ऐसे की विधायकों से सवाल किए गए।

उपचुनाव

केसी वेणुगोपाल को अगर कांग्रेस केरल के सीएम के रूप में चुनती तो कांग्रेस को दो उपचुनावों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले कांग्रेस को केसी वेणुगोपाल के लिए एक सेफ सीट खाली करवाकर उन्हें विधानसभा भेजना होता। दूसरा केसी वेणुगोपाल को सांसद के तौर पर इस्तीफा देना होता, जिसके बाद अलाप्पुझा लोकसभा सीट पर उपचुनाव होता। केसी वेणुगोपाल जब केरल से लोकसभा सदस्य चुने गए तब वे राजस्थान से राज्यसभा सांसद थे। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस राज्यसभा उपचुनाव में वह सीट हार गई।

जन धारणा

कांग्रेस पार्टी ने केरल चुनाव से पहले सीएम फेस का ऐलान नहीं किया था लेकिन पीछले पांच सालों में वीडी सतीशन एक स्वाभाविक पसंद बनकर उभरे। UDF की जीत को कई मुद्दों पर सतीशन के राजनीतिक रुख की पुष्टि के तौर पर देखा गया। सतीशन केरल में विजयन के सबसे प्रबल और मुखर आलोचक थे। सतीशन ने कहा कि अगर UDF 100 से अधिक सीटें हासिल करने में विफल रहता है, तो वे अपना राजनीतिक करियर समाप्त कर देंगे।

यह भी पढ़ें: कौन हैं केरल के अगले मुख्यमंत्री वीडी सतीशन?

1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे सतीशन पेशे से वकील हैं। उन्होंने केरल छात्र संघ (केएसयू) के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और बाद में युवा कांग्रेस के माध्यम से आगे बढ़े। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें