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एआईपीएमटी के लिए सीबीएसई के ड्रेस कोड की निंदा

एआईपीएमटी में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दिये जाने को आज केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी आईयूएमएल ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया...

Author July 26, 2015 17:39 pm
(फोटो रॉयटर्स)

अखिल भारतीय प्री-मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एआईपीएमटी) में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दिये जाने को आज केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी आईयूएमएल ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

इस साल मई में आयोजित एआईपीएमटी परीक्षा में बड़े स्तर पर हुई धांधलियों की पृष्ठभूमि में उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई को दूसरी परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था जिसके बाद सख्त ड्रेस कोड लागू किया गया और किसी भी आभूषण पहनने, बालों में पिन लगाने, सिर पर स्कार्फ या हिजाब पहनने, जूतों, घड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पाबंदी लगा दी गयी।

यहां एक परीक्षा केंद्र में स्कार्फ नहीं हटाने और पवित्र क्रॉस नहीं उतारने वाली एक नन को परीक्षा नहीं देने दी गयी थी। केरल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वी एम सुधीरन ने आज इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नन को परीक्षा देने की अनुमति नहीं देने का अधिकारियों का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण था।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘यह फैसला नागरिकों को धार्मिक प्रक्रियाओं और आस्था रखने के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ था।’’

सुधीरन ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार को इस तरह के कदमों से बचना चाहिए जिनसे आस्था रखने वाले लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।’’

आईयूएमएल के राष्ट्रीय सचिव और सांसद ईटी मुहम्मद बशीर ने भी कोझिकोड में इस तरह के विचार व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा कि हिजाब पर उच्चतम न्यायालय का फैसला सहीं नहीं है। इसमें आस्था के विषय शामिल हैं।

प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की अगुवाई वाली उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अभ्यर्थियों को परंपरागत हिजाब पहनने देने की कुछ मुस्लिम संगठनों की याचिका को खारिज करते हुए कहा था, ‘‘आस्था किसी तरह का कपड़ा पहनने से अलग चीज है’’ और कुछ ‘‘वाजिब पाबंदी’’ जरूरी हैं।

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