क्या मुंबई पर पानी में डूबने का खतरा मंडरा रहा है? मुंबई उन दक्षिण एशियाई महानगरों में शामिल है जहां समुद्र का बढ़ता जलस्तर भविष्य में स्थायी जलभराव का खतरा पैदा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पूरे दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घर हमेशा के लिए खोने के तत्काल खतरे का सामना कर रहे हैं।

31 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गई रिपोर्ट ‘Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address’ में मुंबई, कोलकाता और ढाका को ऐसे शहरों के तौर पर चिन्हित किया गया है। यहां समुद्र के बढ़ते स्तर का असर सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है।

2024 में रिकॉर्ड गति से बढ़ा समुद्र का जलस्तर

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर 5.9 मिलीमीटर की रिकॉर्ड दर से बढ़ा जबकि 2014 से 2023 के बीच सालाना औसत वृद्धि 4.7 मिलीमीटर रही थी।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि उत्सर्जन में आक्रामक कटौती की स्थिति में भी साल 2100 तक वैश्विक समुद्र स्तर कम से कम 0.5 मीटर बढ़ सकता है। वहीं अगर पश्चिमी अंटार्कटिक बर्फ की चादर में अस्थिरता जैसे सबसे खराब हालात बने तो यह वृद्धि 2 मीटर तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में तटीय इलाकों में अत्यधिक समुद्री जलस्तर की घटनाएं हर साल होने लग सकती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों और मुंबई, कोलकाता व ढाका जैसे शहरों में इसका सबसे बड़ा असर लोगों के विस्थापन के रूप में सामने आएगा। 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों के स्थायी जलभराव के कारण घर खोने के तत्काल खतरे में होने की बात कही गई है।

मुंबई में लैंड सब्सिडेंस और खारे पानी की घुसपैठ का खतरा

मुंबई के लिए खतरा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यहां जमीन धंसने (land subsidence) और समुद्र के खारे पानी के अंदर आने का जोखिम भी मौजूद है। इससे भूजल स्रोत और तटीय इलाकों के कुएं दूषित हो सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र में उठने वाले स्टॉर्म सर्ज यानी तूफानी लहरें मुंबई की स्वच्छता व्यवस्था, घरों और परिवहन ढांचे पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।

2050 तक मुंबई का 80% हिस्सा डूबने का अनुमान

UN की रिपोर्ट में जताई गई चिंता मुंबई के क्लाइमेट एक्शन प्लान (MCAP) में सामने आई चेतावनियों से भी मेल खाती है। BMC ने 2021 में जारी इस योजना में अनुमान लगाया था कि 2050 तक मुंबई के द्वीपीय शहर का करीब 80 फीसदी हिस्सा जलमग्न हो सकता है।

योजना में यह भी अनुमान लगाया गया था कि अगले तीन दशकों में मुंबई समेत भारत के 11 अन्य तटीय शहरों में समुद्र का जलस्तर 0.1 से 0.3 मीटर तक बढ़ सकता है।

तीन तरफ समुद्र से घिरी है मुंबई

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एमेरिटस प्रोफेसर और IIT बॉम्बे के विजिटिंग प्रोफेसर जलवायु वैज्ञानिक रघु मुर्तुगुड्डे ने कहा कि मुंबई की भौगोलिक स्थिति और बदलते मौसम के कारण उसका जोखिम बढ़ गया है।

उन्होंने कहा, ”मुंबई तीन तरफ से अरब सागर से घिरी हुई है।” उनके मुताबिक, अरब सागर के गर्म होने से समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव हो रहा है और अत्यधिक बारिश तथा गर्मी की घटनाएं बढ़ रही हैं।

मुंबई में बढ़ रही है भारी बारिश की तीव्रता

BMC के बारिश के आंकड़े भी मुंबई में अत्यधिक बारिश के पैटर्न में बदलाव की ओर इशारा करते हैं। पिछले छह वर्षों में बहुत भारी बारिश की घटनाओं के दौरान औसत बारिश 132 मिमी से बढ़कर 182 मिमी हो गई है।

पिछले एक दशक में मुंबई में चार घंटे या उससे ज्यादा समय तक चलने वाली बहुत भारी बारिश के 28 दौर दर्ज किए गए हैं। इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान होने के बावजूद, जुलाई के पहले आठ दिनों में ही मुंबई में 24 घंटे के भीतर 100 मिमी से ज्यादा बारिश के तीन मामले सामने आए।

मुर्तुगुड्डे ने कहा, ”अनियमित बारिश के साथ ऊंची ज्वारीय लहरें भी तटीय बाढ़ का कारण बनती हैं। शहर में बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है और इसी समय समुद्र का स्तर भी बढ़ रहा है।”

UN ने मानव विस्थापन पर ध्यान देने की अपील की

UN की रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु जोखिम का आकलन करते समय सिर्फ आर्थिक और बुनियादी ढांचे के नुकसान को नहीं बल्कि लोगों के विस्थापन और सामाजिक प्रभावों को भी ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 50 करोड़ लोग ऐसे निचले तटीय इलाकों में रहते हैं जहां नदियां समुद्र से मिलती हैं। ऐसे में जलवायु अनुकूलन, आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने और नुकसान की भरपाई से जुड़े उपायों में निवेश करना अब बेहद जरूरी हो गया है।