मुंबई में पानी की कमी की आशंका को देखते हुए बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) फिर से अपनी योजनाओं पर काम कर रही है। जल टैंकरों की निगरानी बढ़ाई जा रही है और लोगों से पानी बचाकर इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। इसकी वजह आईएमडी (मौसम विभाग) का नया अनुमान है, जिसमें कहा गया है कि इस साल देश में सामान्य से कम यानी औसत बारिश का लगभग 90% ही बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग द्वारा बारिश के अनुमान में की गई इस कमी ने नागरिक प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी के चलते सोमवार को बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक बंद-द्वार बैठक आयोजित की। इसमें साल 2027 की गर्मियों तक मुंबई में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा की गई। मुंबई अपनी रोजमर्रा की अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह वर्षा जल पर निर्भर है।
बैठक के दौरान बीएमसी प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अगले दो महीनों तक झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) में होने वाली वर्षा पर कड़ी निगरानी रखें।
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,” हालांकि अभी कोई ठोस कदम उठाना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन औसत वर्षा के केवल 90 प्रतिशत होने का हालिया पूर्वानुमान चिंताजनक है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि मुंबई की झीलों में इतना पानी उपलब्ध रहे कि अगला मॉनसून आने तक शहर की जल आवश्यकताएं पूरी होती रहें, भले ही झीलों के क्षेत्रों में अपेक्षित वर्षा न हो।”
इसके अलावा, अल नीनो (El Niño) मौसम प्रणाली के कारण सामान्य से ज्यादा गर्म मौसम रहने की संभावना ने भी प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।
झीलों में पानी की कमी
एक अधिकारी ने कहा, ”अगर झीलों को पर्याप्त बारिश नहीं मिली और अक्टूबर में शहर में भीषण गर्मी पड़ी तो झीलों का पानी तेजी से वाष्पित (भाप बनकर उड़) हो सकता है। इससे 2027 की गर्मियों में पानी की स्थिति चिंताजनक हो सकती है।”
तत्काल कदम के तौर पर बीएमसी मुंबई के विभिन्न जल-भराव केंद्रों (फिलिंग प्वाइंट्स) पर पानी के टैंकरों की निगरानी बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि पानी की आपूर्ति सभी तक उचित और समान रूप से पहुंच सके।
सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”हम फिलिंग प्वाइंट्स पर कड़ी निगरानी रखने और पानी के टैंकरों के संचालन को नियंत्रित करने पर विचार कर रहे हैं ताकि मांग बढ़ने पर भी पानी के दाम सामान्य स्तर से अधिक न बढ़ें। इसके अलावा, हम लोगों से पानी का समझदारी से उपयोग करने की अपील करेंगे और इसके लिए सलाह-सूचनाएं (एडवाइजरी) भी जारी की जाएंगी।”
मुंबई में पानी की कटौती
फिलहाल मुंबई में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू है जो 15 मई से प्रभावी हुई थी। अधिकारियों ने कहा कि अभी पानी की कटौती बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि, अगले दो-तीन महीनों तक झीलों के जलस्तर पर नजर रखने के बाद आगे का फैसला किया जाएगा।
बीएमसी के एक सूत्र ने कहा, ”हम अगले दो-तीन महीनों तक स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।” मौजूदा मौसम पूर्वानुमानों को देखते हुए बीएमसी विभिन्न संभावनाओं पर विचार कर रही है।
एक बीएमसी अधिकारी ने कहा, ”आमतौर पर मुंबई के जलग्रहण क्षेत्रों में मॉनसून के पहले दो महीनों के दौरान पर्याप्त बारिश हो जाती है और बाद में होने वाली अतिरिक्त बारिश का पानी बह जाता है। अगर इस बार भी ऐसा होता है तो सामान्य से कम बारिश होने पर भी हमें ज्यादा परेशानी नहीं होगी। लेकिन पर्याप्त बारिश न होने और बांधों के पूरी तरह न भर पाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए हर स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।”
मुंबई बारिश पर इतनी निर्भर क्यों है?
मुंबई की रोज़ाना की पेयजल जरूरतें सात झीलों से पूरी होती हैं-
अपर वैतरणा झील (Upper Vaitarna Lake)
मोडक सागर (Modak Sagar)
तानसा झील (Tansa Lake)
मिडिल वैतरणा बांध (Middle Vaitarna Dam)
भत्सा बांध (Bhatsa Dam)
विहार झील (Vihar Lake)
तुलसी झील (Tulsi Lake)
इन सातों जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है।
हर साल जून से सितंबर के मॉनसून महीनों में ये झीलें भरती हैं। इसके बाद पाइपलाइनों और जलमार्गों के विशाल नेटवर्क के जरिए इन झीलों से प्रतिदिन लगभग 3950 मिलियन लीटर (एमएलडी) पेयजल पूरे मुंबई शहर में पहुंचाया जाता है।
मौजूदा वक्त में मुंबई के पास पेयजल का कोई बड़ा वैकल्पिक स्रोत नहीं है। यही वजह है कि शहर की जल आपूर्ति पूरी तरह अच्छे मॉनसून पर निर्भर करती है।
मंगलवार को मुंबई की सातों झीलों में कुल जल भंडार उनकी क्षमता का 15 प्रतिशत यानी लगभग 2.21 लाख मिलियन लीटर तक पहुंच गया था। चूंकि झीलों की कुल क्षमता का हर 1 प्रतिशत पानी लगभग 3 दिन की जरूरतें पूरी कर सकता है। इसलिए मौजूदा जल भंडार से शहर की पानी की मांग लगभग 45 दिनों तक पूरी की जा सकती है।
