मुंबई के विले पार्ले (वेस्ट) में मंगलवार को एक रिहायशी इमारत में आग लगने से एक महिला और बच्चे की मौत हो गई जबकि चार लोग घायल हो गए। इस घटना में मृत महिला बच्चे के परिवार के घर पर लगभग एक साल से काम कर रही थी।

शांता भवन के 11वीं मंजिल के फ्लैट में आग लगने पर 23 वर्षीय अंकिता छेत्री उस बेडरूम की ओर दौड़ी जहां ढाई वर्षीय अबीर बाटविया सो रहा था। वह बच्चे के पास पहुंची और कमरे में धुआं भरते देख उसे बचाने की कोशिश करने लगी। छेत्री अबीर को साथ वाले बाथरूम में ले गई, इस उम्मीद में कि इससे वो आग और धुएँ से कुछ हद तक बच जाएंगे। दोनों की मौत दम घुटने से हुई। अबीर अंकिता की गोद में मिला।

अंकिता लगभग एक साल से परिवार के साथ काम कर रही थीं

बुधवार शाम तक बटाविया परिवार अबीर के अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कूपर अस्पताल में इकट्ठा हुआ था लेकिन अंकिता छेत्री का शव मुर्दाघर में ही पड़ा रहा। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि कोई रिश्तेदार मौजूद न होने के कारण पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका। बिल्डिंग के सचिव केतन पारिख ने बताया कि अंकिता पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की रहने वाली थीं और उनका एक रिश्तेदार उनकी पहचान करने के लिए भवन आया था। अंकिता के परिवार को उनकी मृत्यु की सूचना दे दी गई है और वे शव लेने के लिए रास्ते में हैं और गुरुवार सुबह तक पहुंच जाएंगे। अंकिता छेत्री एक साल से भी कम समय से परिवार के साथ काम कर रही थीं।

बेडरूम की खिड़की खोल दी जाती तो शायद दोनों बच जाते

फायर ब्रिगेड कर्मियों की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग रात करीब 9.45 बजे हॉल में लगी। अधिकारियों को संदेह है कि टेलीविजन के ऊपर लगे एसी यूनिट में बिजली की खराबी या अंकिता चेत्री द्वारा इस्तेमाल की जा रही इस्त्री के कारण आग लगी होगी। जैसे-जैसे आग फैलती गई हिरेन ने उस बेडरूम तक पहुंचने की कोशिश की जहां अबीर और अंकिता फंसे हुए थे लेकिन गर्मी और धुएं के कारण वह अंदर नहीं जा सका। दमकल अधिकारी ने बताया कि अगर बेडरूम की खिड़की खोल दी जाती तो शायद दोनों बच जाते।

एक रिश्तेदार ने कहा, “अबीर अपने माता-पिता की सबसे छोटी संतान था। उसके माता-पिता बात करने की स्थिति में नहीं हैं। वे बेहोश और सदमे में हैं इसलिए हम पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी करने आए हैं।” यह घटना रात करीब 10 बजे शांता भवन में घटी। यह आवासीय परियोजना बटाविया परिवार की रियल एस्टेट कंपनी लाभ होम्स क्रिएशन्स एंड होल्डिंग्स द्वारा 2020 में पूरी की गई थी। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर 64 वर्षीय हिरेन बटाविया अपने परिवार के साथ इसी फ्लैट में रहते थे।

बगल के बेडरूम में हिरेन के 32 वर्षीय बेटे पार्थ को शुरू में आग का पता नहीं चला। जब उसने दरवाजा खोला, तो धुएं का गुबार आया। उसने तौलिये से धुएं को रोकने की कोशिश की, फिर बालकनी में चला गया। फायरकर्मियों ने पार्थ को बचाया और उसे नानावती अस्पताल ले गए।

बिल्डिंग के निवासियों को नहीं आता था फायर उपकरण चलाना

इमारत में धुआं भरते ही कई निवासी छत पर भाग गए। इमारत के सचिव और अन्य लोगों ने आग बुझाने के अभियान में मदद करने की कोशिश की जबकि चौकीदार शिवम द्विवेदी और अग्निशमन अधिकारी मनोज सोनावाने बचाव अभियान के दौरान मामूली रूप से घायल हो गए। इमारत का परिसर भी बचाव अभियान के लिए एक चुनौती साबित हुआ। दमकल कर्मियों के लिए इमारत तक सीधे पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी, जिसके चलते दमकलकर्मियों को सीढ़ियों के रास्ते बचाव कार्य करना पड़ा।

इमारत में अग्निशमन प्रणाली थी जिसमें स्प्रिंकलर और अग्निशामक यंत्रों की व्यवस्था थी लेकिन कुछ ही निवासियों को पंप चलाना आता था। बीएमसी के अतिरिक्त नगर आयुक्त विपिन शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “इमारत में मौजूद दो लोगों को पंप चलाना आता था और वे सबसे ऊपरी मंजिल पर थे इसलिए पंप का इस्तेमाल नहीं हुआ।”

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मुंबई के विले पार्ले (वेस्ट) में बैप्टिस्टा रोड पर एक रिहायशी इमारत में आग लगने से 23 साल की महिला और ढाई साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। बृहन्मुंबई नगर निगम के आपदा प्रबंधन सेल के मुताबिक, मृतकों की पहचान अंकिता और ढाई साल के अबीर के तौर पर हुई है। घायलों की पहचान पार्थ, हिरेन, यशस्वी और अभिषेक के तौर पर हुई है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें