मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर सोमवार तड़के हुए भूस्खलन के बाद 6,695 करोड़ रुपये की मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे परियोजना का कुछ हिस्सा आज ठप हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस द्वारा 6,695 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक का उद्घाटन करने के बमुश्किल 9 हफ्ते बाद भूस्खलन से कॉरिडोर को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। इसके चलते ट्रैफिक को वापस उस पुराने मुंबई-पुणे राजमार्ग पर डायवर्ट किया गया है जिसे बाईपास करने के लिए इसे बनाया गया था।
इस रुकावट ने महाराष्ट्र की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक गलियारे की संरचनात्मक तैयारियों पर सवाल उठते हैं जिसे दुर्घटना-बहुल्य खंडाला घाट खंड के सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश किया गया था। मिसिंग लिंक’ खोपोली और सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच स्थित 19.8 किलोमीटर लंबे खंडाला घाट खंड को बाईपास करने के लिए बनाया गया 13.3 किलोमीटर लंबा खंड है।
सालों से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यातायात को इस 6-लेन खंड पर केंद्रित होने के लिए मजबूर होना पड़ता था जहां खड़ी ढलानें, मोड़ और तीखे घुमाव अक्सर भयंकर यातायात जाम और दुर्घटनाओं का कारण बनते थे। नए मार्ग के निर्माण से यात्रा की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो गई जिससे मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 20 से 30 मिनट तक कम हो गया और स्पीड लिमिट 100 किमी प्रति घंटा तक हो गई।
इसे इंजीनियरिंग का चमत्कार क्यों माना गया?
13.3 किलोमीटर में फैले मिसिंग लिंक में 1.6 किलोमीटर और 8.9 किलोमीटर की दो जुड़वां सुरंगें, दो हाई-स्पीड वायडक्ट और टाइगर वैली के ऊपर बना 183 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज शामिल है जो इसे देश का अपनी तरह का सबसे ऊंचा पुल बनाता है। लोनावला झील के लगभग 180 मीटर नीचे खोदी गई 8.9 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग जिसे ऑस्ट्रिया की नई सुरंग निर्माण पद्धति का उपयोग करके बनाया गया है, दुनिया की सबसे चौड़ी सड़क सुरंगों में से एक है।
इसमें इतना समय क्यों लगा?
इंजीनियरों को सह्याद्री पहाड़ियों से होकर अस्थायी मार्ग भी बनाने पड़े। इस क्षेत्र की तेज हवाओं, घने कोहरे और भारी मानसूनी बारिश का सामना करने के लिए डिज़ाइन की गई इस परियोजना को पूरा होने में लगभग तीन दशक लग गए। दुर्घटना-बहुल्य घाट खंड के विकल्प की आवश्यकता को सबसे पहले 1995 में आरआईटीईईएस द्वारा पहचाना गया था, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण से भी पहले।
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 2017 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी, निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था लेकिन कोविड-19 महामारी, कठिन भूवैज्ञानिक परिस्थितियों और पश्चिमी घाटों से सुरंग बनाने की इंजीनियरिंग चुनौतियों के कारण इसमें देरी हुई। 1 मई को इसके उद्घाटन के अवसर पर सीएम फड़नवीस ने ‘मिसिंग लिंक’ को महाराष्ट्र का नया ‘कनेक्टिंग लिंक’ बताया जबकि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने इसे घाट खंड पर भीड़भाड़ और दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान बताया।
‘मिसिंग लिंक’ यातायात के लिए खोले जाने के लगभग नौ सप्ताह बाद ही बंद
‘मिसिंग लिंक’ को यातायात के लिए खोले जाने के लगभग नौ सप्ताह बाद ही पहली बार भारी व्यवधान का सामना करना पड़ा। भूस्खलन और एक दीवार को हुए नुकसान के कारण अधिकारियों को इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। भूस्खलन के परिणामस्वरूप पुणे से मुंबई जाने वाले मार्ग पर भारी जल प्रवाह हो गया।
राज्य राजमार्ग पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार तड़के लगातार भारी बारिश के बाद घटी। अधिकारियों ने बताया कि मिसिंग लिंक के पुणे-मुंबई मार्ग पर पहली सुरंग के अंत के पास भूस्खलन हुआ जिससे एक दीवार क्षतिग्रस्त हो गई और मार्ग यातायात के लिए असुरक्षित हो गया। यह व्यवधान ऐसे समय में आया जब पुणे-मुंबई हाइवे पर एक पेड़ बिजली की लाइन पर गिरने के कारण मार्ग भी बंद हो गया था, साथ ही भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव हो गया था। दोनों मार्गों के एक साथ प्रभावित होने के कारण, अधिकारियों ने वाहन चालकों से पुणे और मुंबई के बीच यात्रा स्थगित करने और आधिकारिक यातायात निर्देशों का पालन करने की अपील की।
यह बंद परियोजना के उद्घाटन के महज नौ सप्ताह बाद हुआ है जब इसे देश के पहले एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के 2002 में खुलने के बाद से क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सबसे बड़े अपग्रेडेशन के रूप में प्रदर्शित किया गया था।
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मानसून के कारण हुए भूस्खलन से 6,695 करोड़ रुपये की मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे परियोजना का कुछ हिस्सा आज ठप हो गया। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने इसका कारण प्रकृति को बताते हुए इसे ईश्वरीय घटना करार दिया। एमएसआरडीसी के उपाध्यक्ष अनिल कुमार गायकवाड़ ने कहा, “यह ठेकेदार की गलती नहीं है, यह प्रकृति का प्रकोप है।” खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
