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मुंबई में 73 करोड़ के ग्राउंडवाटर चोरी में बिल्डिंग मालिक गिरफ्तार, 11 साल से टैंकर ऑपरेटरों से मिलकर गैरकानूनी ढंग से बेच रहे थे पानी

एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने पिछले 11 साल में 6.1 लाख टैंकर पानी बेचा। इनमें एक टैंकर की क्षमता करीब 10 हजार लीटर थी और एक टैंकर पानी का औसत मूल्य 1200 रुपये था।

Mumbai, Azad Maidan police, FIR, theft of groundwater, Kalbadevi in south Mumbai, Tripuraprasad Pandya, Opens wells, RTI activist, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiएफआईआर के अनुसार आरोपियों ने पिछले 11 साल में 6.1 लाख टैंकर पानी बेचा। (प्रतीकात्मक फोटो)

मुंबई में ग्राउंडवाटर चोरी के मामले में बिल्डिंग मालिक को गिरफ्तार किया गया है। अपनी तरह के दुर्लभ मामले में आजाद मैदान पुलिस ने 73 करोड़ रुपये के ग्राउंड वाटर चोरी के मामले में 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार ये लोग दक्षिण मुंबई के कल्बादेवी इलाके में स्थित इमारत के परिसर में दो कुएं के जरिये पिछले 11 साल से गैरकानूनी रूप से पानी निकाल रहे थे। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें बोमनजी मास्टर लेन स्थित पांड्या मेंशन का मालिक और तीन वाटर टैंकर ऑपरेटर शामिल हैं।

पुलिस का कहना है बिल्डिंग के मालिक गैरकानूनी ढंग से दो कुएं खुदवाए और उसमें वाटर पंप लगवा दिया। इन लोगों ने पानी निकालने के लिए गैरकानूनी ढंग से बिजली कनेशक्शन का भी प्रयोग किया। एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने पिछले 11 साल में 6.1 लाख टैंकर पानी बेचा। इनमें एक टैंकर की क्षमता करीब 10 हजार लीटर थी और एक टैंकर पानी का औसत मूल्य 1200 रुपये था। ऐसे में इन लोगों ने कम से कम 73.19 करोड़ रुपये अर्जित किए।

आजाद मैदान पुलिस का कहना है कि आरोपी त्रिपुराप्रसाद नानालाल पंड्या और उनकी कंपनी के दो डायरेक्टर प्रकाश पंड्या और मनोज पंड्या टैंकर मालिकों और ऑपरेटरों के जरिये मिल कर पानी निकाल रहे थे। आरटीआई एक्टिविस्ट सुरेशकुमरा ढोका की तरफ से उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

पुलिस इंस्पेक्टर (क्राइम) रमेश यादव ने कहा कि इन लोगों ने 2006 से 2017 के बीच ग्राउंडवाटर चुराकर बेचा और 73.19 करोड़ रुपये कमाए। इससे पहले लोकमान्य तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ने पंड्या मेंशन के मालिकों के खिलाफ बिल्डिंग प्लान में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में केस दर्ज किया था। इन लोगों ने बिल्डिंग परिसर में दो कुएं खुदवाए थे और उसका पानी बेचकर मुनाफा कमा रहे थे।

एनजीटी ने इन कुएं को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया था। इससे पहले साल 2018 में मद्रास हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि गैरकानून ढंग से भूजल का दोहन करने वालों के खिलाफ आईपीसी के तहत दंडित किया जाएगा।

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