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नए झंडे, बैनर के साथ मुंबई के आजाद मैदान में MNS ने निकाली रैली, पर लोगों के निशाने पर आ गए उद्धव ठाकरे

रैली में करीब दो लाख लोग इकट्ठा हो सकते हैं। खास बात है कि जो लोग रैली में शामिल हुए उनके लिए भगवा रंग की टीशर्ट, टोपी और हाथ पर बांधने वाली पट्टी बनवाई गईं, जिनपर शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का चिन्ह बना हुआ है।

राज ठाकरे की रैली के बीच सोशल मीडिया में लोगों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना पर निशाना साधा है। (ANI)

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने पिछले महीने पार्टी का नया झंडा लॉन्च करने के बाद पहली बार रविवार (9 फरवरी, 2020) को मुंबई में रैली निकाली। न्यूज एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक मनसे कार्यकर्ता अवैध बांग्लादेशी और पाकिस्तानी अप्रवासियों को निकालने की मांग करने के लिए आजाद मैदान में एक रैली में भाग लेने के लिए इकट्ठा हुए हैं। बताया जाता है कि रैली में करीब दो लाख लोग इकट्ठा हो सकते हैं। खास बात है कि जो लोग रैली में शामिल हुए उनके लिए भगवा रंग की टीशर्ट, टोपी और हाथ पर बांधने वाली पट्टी बनवाई गईं, जिनपर शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का चिन्ह बना हुआ है।

हालांकि राज ठाकरे की रैली के बीच सोशल मीडिया यूजर्स ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा से गठबंधन करने वाली शिवसेना ने चुनाव बाद भाजपा से यह कहकर गठबंधन तोड़ दिया पार्टी ने चुनाव पूर्व किए गए अपने वादों को नहीं निभाया। उद्धव ठाकरे बाद में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

इस पर शिवसेना पर निशाना साधते हुए ट्विटर यूजर हितिक्षा भट्ट @hi2di_bhatt ट्वीट कर लिखते हैं, ‘उद्धव ऑक्सीजन पर आ गए… कल से सामना में मोदी जी के गुणगान करने लगेंगे।’ चौधरी @s_dhankar लिखते हैं, ‘कांग्रेस से हाथ मिलाने पर शिवसेना को बाद में अहसास होगा कि उसने भाजपा छोड़कर गलती की है। एमएनएस महराष्ट्र में स्थानीय हिंदूवादी पार्टी होगी।’

इसी तरह कीर्ति तिवारी @ikirtitiwari लिखती हैं, ‘राज ठाकरे ने आज मुबंई को भगवामयी बना दिया है। राज से सबसे अधिक अभी किसी को परेशानी हो रही है तो वो हैं शिवसेना। उन्हें पता है, राज ठाकरे ही शिव सैनिकों की पहली पसंद हुआ करते थे। आज भी मराठी मानुष यह कह ही देता है की बालासाहेब के उत्तराधिकारी तो राज साहेब को ही होना चाहिए था। खैर…।’ डू फॉर नेशन लिखती हैं, ‘सोनिया सेना तो गई।’

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