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मुंबई अस्पताल अग्निकांड: डोरमैट में लपेट कर ले जानी पड़ी दो महीने की बेटी की लाश- रुला देने वाली है राजेश की कहानी

जब आग लगी तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। जिस जगह उनकी पत्नी भर्ती थीं वहां पर काफी धुआं भर गया था। जब तक कि उन्हें बाहर रेस्क्यू किया जाता वो बेहोश हो गईं और बच्ची बगल में ही छूट गई।

Author December 19, 2018 2:15 PM
अपनी दो माह की बेटी का शव हाथों में लिए खड़े राजेश यादव. (एक्सप्रेस फोटो/अमित चक्रवर्ती)

राजेश यादव की गोद में उनकी दो महीने की बेटी की लाश पड़ी थी। उसे ढंकने के लिए उनके पास कपड़े तक नहीं थे। इसलिए उन्होंने नीले रंग के डोरमैट से उसे जैसे-तैसे लपेट रखा था। आंखों असीम पीड़ा भरे हुए मुंबई के आरएन कूपर अस्पताल के बाहर खड़े इस बाप को देखकर किसी का भी दिल पसीज जाता। मंगलवार को ईएसआईसी (इंप्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन) अस्पताल में लगी आग ने उनके घर में गूंजने वाली किलकारी को हमेशा के लिए छीन लिया। जिस बेटी का उन्होंने अभी नाम तक नहीं रखा था, उसी का शव डोरमैट से लेपट वह खड़े थे। उन्होंने रुंधे गले बताया,” मुझे इसके सिवाय शव को लपटने के लिए कुछ मिला ही नहीं।” उनकी बेटी सोमवार को ईएसआईसी अस्पताल में आग की चपेट में आने से मारे गए 8 लोगों में शामिल थी।

बतौर कुक एक कैटरिंग कंपनी में काम करने वाले राजेश यादव की बहन डिंपल और पत्नी रुक्मणी उनकी नवजात बच्ची के साथ ईएसआईसी अस्पताल में थे। आग लगने के दौरान उनकी बहन और पत्नी बेहोशी की हालत में मिलीं। बहन को पहले ही अग्निशमन के कर्मचारियों ने बचाकर कूपर अस्पताल में भर्ती करा दिया था। लेकिन, जब यादव कूपर अस्पताल पहुंचे तो सिर्फ बहन थी। उनकी बीवी और बच्ची नहीं मिली। मगर, वक्त रहते बीवी को भी बचा लिया गया था। राजेश को अपनी बेटी की चिंता सता रही थी। वह तुरंत कूपर अस्पताल से भागते हुए ईएसआईसी अस्पताल (जहां आग लगी थी।) पहुंचे। वह सभी से अपनी बेटी के बारे में पूछ रहे थे। आखिर में उन्होंने अपनी बच्ची का शव रात के 1 बजे खोज निकाला।

दरअसल, उनकी बीवी का ईएसआईसी अस्पातल में पथरी का ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान उन्हें अपनी दो माह की बेटी को रोजाना दूध पिलाने के लिए उसकी मां के पास ले जाना पड़ता था। अग्निकांड वाले दिन वह और उनकी बहन अस्पताल में मौजूद थे। उन्होंने बच्ची को उनके हवाले करके अपने काम पर चले गए। लेकिन, जब आग लगी तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। जिस जगह उनकी पत्नी भर्ती थीं वहां पर काफी धुआं भर गया था। बच्ची साथ होने की वजह से उनकी बीवी और बहन ने बाहर कूदना मुनासिब नहीं समझा। जब तक कि उन्हें बाहर रेस्क्यू किया जाता वे दोनों बेहोश हो गईं और बच्ची बगल में ही छूट गई। धुएं से भरे अस्पताल में फायर-कर्मचारियों को भी नवजात बच्ची दिखाई नहीं दी। इस दौरान उन्होंने राजेश की बहन और उनकी पत्नी को बचा लिया। लेकिन, बच्ची वहीं छूट गई। बच्ची की मौत दम घुटने से हुई।

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