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मुंबई बिल्डिंग हादसा: 2 बेटों के डेथ सर्टिफिकेट बनवाने और जनाजे के इंतजाम में फंसा बाप, शोक करने की भी मोहलत नहीं

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इदरिसी ने बताया,"मुझे नहीं पता था कि इमारत की हालत खस्ताहाल है या इसके मरम्मत की बात चल रही है। ब्रोकर ने हमें कभी नहीं बताया।"

Author मुंबई | July 18, 2019 9:31 AM
मुंबई हादसे की तस्वीर। (express photo)

मुंबई के डोंगरी स्थित केसरबाई बिल्डिंग हादसे में कई जिदंगियां तबाह हो गईं। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों की हालत ऐसी है कि उन्हें उन्हें शोक जाहिर करने की भी मोहलत नहीं मिल रही। अस्पताल से लेकर डेथ सर्टिफिकेट बनवाने तक कई ऐसी फजीहतें हैं जो उनके दुखों को और गहरा बना रहे हैं। 28 साल के रशीद इदरिसी ने अपने दो मासूम बच्चों की जिदंगी हादसे में खत्म होते हुए देखी। लेकिन, परिस्थितियां ऐसी हैं कि उन्हें ठहरकर अपने बच्चों की यादों को सहेजने की फुरसत भी नहीं मिल पा रही है।

पेशे से मजदूर इदरिसी भूखे-प्यासे अस्पताल में अपने बच्चों अरबाज (7) और शहजाद (8) के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दौड़-भाग करते रहे। ऊपर से घायल पत्नी अलीमा बानो की चिंता अलग से। मुंबई के जेज अस्पताल में सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के अलावा इदरिसी के सामने बच्चों के शवों को रखने के लिए ताबूत का भी बंदोबस्त करना था। इसके अलावा शवों को लखनऊ स्थित अपने गांव ले जाने के लिए भी 50,000 रुपये जुटाने की चुनौती थी। इसके अलावा पुलिस की जांच-पड़ताल में भी शामिल होने की चुनौती बनी रही।

हादसे के दौरान अदरिसी की बीवी अलीमा और उनके दो बच्चे मलबे में दब गए थे। 18 घंटे बाद बुधवार को उन्हें पांच बचे सुबह निकाला गया। हादसे में मां को गंभीर चोटें आई थीं, जबकि दोनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। अभी दो महीने पहले ही यह परिवार मुंबई शिफ्ट हुआ था। इसी दौरान अलीमा के पथरी का ऑपरेशन भी हुआ। बच्चे अरबाज और शहजाद ने पिता की मदद के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी। द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इदरिसी ने बताया,”मुझे नहीं पता था कि इमारत की हालत खस्ताहाल है या इसके मरम्मत की बात चल रही है। ब्रोकर ने हमें कभी नहीं बताया।”

जब बुधवार को जेजे अस्पताल में बच्चों का शव लाया गया तब इदरिसी को पुलिस के साथ अपना बयान दर्ज कराने जाना पड़ा। इसके बाद इसके बाद उसने ताबूत खरीदने और किराये के पैसों के लिए अपने दोस्तों को फोन करना शुरू किया। इस दौरान एक प्राइवेट एजेंट ने 18,000 रुपये में शवों को फ्लाइट के जरिए पहुंचाने की बात कही। हालांकि, एक घंटे के बाद सरकारी डॉक्टर ने इदरिसी को आश्वस्थ किया कि उसके सारे इंतजाम अस्पताल फ्री में मुहैया कराएगा। जिसके बाद शाम के 7.25 की मुंबई-लखनऊ फ्लाइट से जाना तय हुआ। लेकिन, इस दौरान ट्रेवेल एजेंट ने बताया कि बच्चों के डेथ सर्टिफिकेट में उनके बीच के नाम की स्पेलिंग गलत है और यह उन्हें हवाई जहाज से ले जाने में परेशानी खड़ी कर सकता है। दरअसल, इदरिसी ने डेथ सर्टिफिकेट पर बच्चे की स्पेलिंग ‘Rashid’ लिखवाई थी। जबकि, उसके आधार कार्ड पर नाम ‘Mohd Rasseed’ था।

इस दौरान आनन-फानन में इदरिसी ने पुलिस और एयरलाइंस से संपर्क किया और बताया कि उसके पास डॉक्यूमेंट्स के नाम पर सिर्फ आधार कार्ड ही है, जबकि बाकी सारा सामान हादसे में खत्म हो गया। दोपहर बाद 3.45 बजे डोंगरी पुलिस बच्चों के नाम को सही कराने पहुंची। इस दौरान फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के डॉक्टर ने मेडिकल पेपर में कुछ जरूरी तब्दिलियां की। आखिरकार साढ़े 4 बजे इदरिसी ने एक मेडिकल एंबुलेंस एयरपोर्ट के लिए किराए पर लिया और रवाना हुआ।

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