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हेडली ने बताया, एक बार अमेरिका ने दिया मेरी पाकिस्तान यात्रा का खर्च, लश्कर को मैंने दिए थे 70 लाख रुपए

हेडली ने दावा किया कि उसने मुम्बई हमले से दो साल पहले साल 2006 तक लश्कर-ए-तैयबा को करीब 70 लाख रुपए का दान दिया था।

Author मुंबई | Updated: March 23, 2016 8:02 PM
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पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली ने बुधवार को बताया कि अमेरिका ने एक बार उसकी पाकिस्तान यात्रा का खर्च दिया था। साथ ही हेडली ने दावा किया कि उसने मुम्बई हमले से दो साल पहले साल 2006 तक लश्कर-ए-तैयबा को करीब 70 लाख रुपए का दान दिया था। हेडली से अमेरिका से एक वीडियो लिंक के जरिये जिरह की गई। उसने अदालत को बताया कि 1998 में उसकी गिरफ्तारी के बाद, अमेरिका की ड्रग इनफोर्समेंट अथॉरिटी(डीईए ) ने मेरी यात्रा का खर्च दिया था। मैं तब डीईए के सम्पर्क में था लेकिन यह सच नहीं है कि 1988 और 1998 के बीच मैं डीईए को सूचना मुहैया करा रहा था या उसकी सहायता कर रहा था।

साथ ही हेडली ने उन खबरों का खंडन किया कि उसे लश्कर-ए-तैयबा से धनराशि प्राप्त हुई। कोर्ट को हेडली ने बताया कि मैंने लश्कर से कभी धनराशि प्राप्त नहीं की..यह पूरी तरह से झूठ है। मैंने खुद लश्कर को धनराशि दी थी। मैं जब तक उससे जुड़ा रहा मैंने उस अवधि के दौरान उसे 60 से 70 लाख से अधिक पाकिस्तानी रूपयों की धनराशि दान दी। मेरा आखिरी दान 2006 में था। उसने स्पष्ट किया कि धनराशि लश्करे तैयबा के किसी विशिष्ट कार्य के लिए नहीं थी बल्कि वह कई चीजों के लिए एक सामान्य दान था। ये दान न्यूयार्क में मेरे व्यापार एवं उस आय से था जो मैंने पाकिस्तान में कुछ सम्पत्तियां बेचकर अर्जित किया था। मुझे याद नहीं यदि मैंने लश्कर को दिये गए अपने दान के बारे में अमेरिकी अधिकारियों को सूचित किया हो।

हेडली की गवाही में खामियां निकालते हुए मुम्बई आतंकी हमले के षड्यंत्रकर्ता अबु जुंदल के वकील ने दलील दी कि आतंकी हेडली हमलों से पहले दो बार दोषसिद्धि का सामना किया, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हुआ और अमेरिकी सरकार के साथ वादा माफ गवाह की शर्तों का उल्लंघन किया। जुंदल के वकील अब्दुल वहाब खान ने कहा कि हेडली को 1988 और 1998 में अमेरिका की एक अदालत ने कथित ड्रग्स तस्करी के लिए दोषी ठहराया था। हालांकि, दोनों ही मौकों पर हेडली ने अमेरिकी सरकार के साथ वादामाफ गवाह बनने का समझौता कर लिया और उसे कम सजा हुई।

हेडली ने जुंदल के खिलाफ यहां की एक सत्र अदालत में मुम्बई आतंकवादी हमला मामले की सुनवायी कर रहे विशेष न्यायाधीश जी ए सनप से कहा कि वादामाफ गवाह बनने के लिए हुए समझौते की शर्तों में यह भी शामिल था कि मैं किसी भी आपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होऊंगा। मैंने पाकिस्तान जाकर लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होकर इस शर्त का उल्लंघन किया। अपनी चार वर्ष की सजा 1988 में पूरी करने के बाद वह 1992 से 1998 मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त था और उसने इस अवधि के दौरान पाकिस्तान की यात्रा की।

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