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मुंबई: जिस ज़मीन सौदे में छगन भजुबल भ्रष्टाचार के आरोपी हैं, आचार संहिता लागू होने से पहले महाराष्ट्र सरकार ने उसे रद्द किया

छगन भुजबल पर करोडो़ं रुपये के ज़मीन सौदे में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज था। लेकिन, आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से दो दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राहत दे दी है।

Author Updated: September 23, 2019 9:34 AM
महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। (फाइल फोटो सोर्स: पीटीआई)

मुंबई के जिस करोडों रुपये के जमीन सौदे में एनसीपी के बागी नेता छगन भुजबल आरोपी हैं, उस डील को महाराष्ट्र की देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने रद्द कर दिया है। यह फैसला विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से 2 दिन पहले लिया गया है। छगन भुजबल पर मुंबई में हुए करोड़ों रुपये के जमीन सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप है। दरअसल, 19 सितंबर को आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने सार्वजनिक भागीदारी (PPP) पर मुंबई विश्वविद्यालय के कलिना कैंपस के अंदर केंद्रीय पुस्तकालय के निर्माण के लिए कॉन्ट्रैक्ट निरस्तीकरण के आदेश जारी किए। लेकिन, इसके जरिए एक विकल्प सामने उभर कर आया। सरकार क्षतिपूर्ति के रूप में इंडियाबुल्स रियल एस्टेट लिमिटेड (IREL) को 137.07 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई है।

19 फरवरी, 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की देखरेख में इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक कैबिनेट उप-समिति ने टेंडर प्रक्रिया के लिए एक फर्म की नियुक्ति की थी। लेकिन राज्य के ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ (ACB) ने तत्कालीन लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री छगन भुजबल और उनके परिजनों को कथित रूप से अपने एनजीओ (छगन भुजबल चैरिटेबल ट्रस्ट) के लिए जमीन सौदे के बदले दान के रूप में इंडियाबुल्स से 2.5 करोड़ रुपये का किकबैक लेने का आरोप लगाया।

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के आरोपी बनाए जाने के बाद मामले ने जबरदस्त तूल पकड़ा। भुजबल और इंडियाबुल्स की डील प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भी निशाने पर आ गई। जैसे ही महाराष्ट्र में बीजेपी सत्ता में आई, ACB ने भुजबल, उनके भतीजे समीर और पीडब्ल्यूडी से जुड़े कुछ अन्य कर्मचारियों के खिलाफ 2015 में कार्रवाई शुरू की। पूर्व मंत्री भुजबल लगातार इस मामले में आरोपों का सामना करते रहे हैं और फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं। हालांकि, इस दौरान इंडियाबुल्स से किसी के खिलाफ भी मामला दर्ज नहीं किया गया। लेकिन, जब से आरोप लगे हैं तब से 16,188 स्कॉयर मीटर में फैले लाइब्रेरी का काम रुका हुआ है।

मूल व्यवस्था के मुताबिक डेवलपर को 7000 स्कॉयर मीटर प्लॉट को 99 सालों के लिए 1 रुपये प्रति स्कॉयर मीटर के हिसाब से वाणिज्यिक लाभ लेने के लिए दिया गया था। डेवलपर द्वारा अप्रत्याशित रूप से डील में लाभ उठाने पर एसीबी ने इस दौरान जांच शुरू कर दी। अब पीडब्ल्यूडी द्वारा जारी राज्य सरकार के ताजा आदेश में कहा गया है, “सरकार और डेवलपर के बीच इस लीज एग्रीमेंट को समाप्त कर दिया जाएगा और सरकार पट्टे पर ली गई भूमि के कब्जे को भी वापस ले लेगी।” गौतरतलब है कि जब 2010 में लाइब्रेरी की यह योजना शुरू हुई, तब इसकी लागत 88.90 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस संबंध में ताजा आदेश मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आने वाली बुनियादी ढांचे की कैबिनेट सब-कमेटी द्वारा जारी किया गया है।

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