ताज़ा खबर
 

रामगोपाल यादव और किरनमय नंदा के बर्खास्तगी पत्र में मुलायम सिंह के अलग-अलग दस्तखत, क्या कोई और ले रहा इतने अहम फैसले?

मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव के खेमे द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा को पार्टी से निकाल दिया था।

Author January 3, 2017 12:51 PM
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव। (पीटीआई फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी में घमासान के बीच एक हैरान करने वाली बात सामने आई है। 1 जनवरी को पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा किरनमय नंदा और रामगोपाल यादव को पार्टी से निष्काषित करने का जो पत्र जारी किया गया, उन दोनों पत्रों में मुलायम सिंह यादव के हस्ताक्षर अलग अलग हैं। अब सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि कौन मुलायम सिंह यादव की जगह पार्टी के इतने अहम फैसले ले रहा है। बता दें कि  मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव के खेमे द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा को पार्टी से निकाल दिया था। मुलायम सिंह का यह फैसला रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए निकाले जाने के कुछ घंटों बाद आया था।

नंदा को लिखे खत में मुलायम ने कहा कि उन्हें पार्टी विरोधी तत्वों से मिलने के कारण पार्टी से निकाला जाता है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जो खत मुलायम सिंह ने नंदा को भेजा उसमें मुलायम सिंह के पूरे हस्ताक्षर हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे वह करते हैं। जबकि रामगोपाल को लिखे खत में उनका हस्ताक्षर बेहद छोटा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बहुत हैरान करने वाला है क्योंकि मुलायम सिंह यादव हमेशा दस्तखत करते वक्त पूरा नाम लिखते हैं। इतना ही नहीं मुलायम सिंह ने अपना चुनावी हलफनामा जमा कराते वक्त अंग्रेजी में पूरा नाम लिखा था।

बता दें कि मुलायम के फैसलों में दूसरे लोगों के दखल की आशंकाएं सीएम अखिलेश भी जता चुके हैं। पिता के खिलाफ ‘तख्ता पलट’ की अपनी पहल को वाजिब बताते हुए अखिलेश ने रविवार को कहा था कि ‘कुछ लोगों’ ने मुलायम पर काबू कर लिया है। वे अपने मनमुताबिक कागजात पर मुलायम के हस्ताक्षर लेकर फैसले करवा रहे हैं। जब अखिलेश ‘बाहरियों’ के यादव परिवार और पार्टी में दखल देने की बात कह रहे थे तो यह शायद उनकी ओर से पिता मुलायम की खराब होती सेहत को लेकर की गई पहली टिप्पणी थी। अखिलेश ने यह भी कहा था, ‘चुनाव में बस तीन महीने का वक्त बाकी है। कह नहीं सकते कि लोग किस तरह के दस्तावेज पर उनके (मुलायम) साइन करवा लें या उनसे किस तरह के फैसले करवा लें। पार्टी के हित के मद्देनजर मुझे दखल देना पड़ा। आखिर में अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो नेताजी से ज्यादा खुश और कोई नहीं होगा। वह मेरे नेता ही नहीं, पिता भी हैं। मैं उनका सम्मान करता रहूंगा। कोई भी इस पिता-पुत्र संबंध को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।’

किरनमय नंदा के पत्र में मुलायम सिंह के दस्तखत ः

mulayam-sign-1

 

mulaym-sign-2 रामगोपाल यादव के लिखे पत्र में मुलायम के छोटे हस्ताक्षर ः mulayam-english-sign मुलायम सिंह के चुनावी हलफनामे पर उनके अंग्रेजी दस्तखत

समाजवादी पार्टी विवाद: किसे मिलेगा ‘साइकिल’ का चिन्ह? जानिए चुनाव आयोग इन तरीकों से कर सकता है फैसला, देखें वीडियो ः

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X