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मुलायम पर उन्हीं का दांव आजमाने की कोशिश में भाजपा

अंशुमान शुक्ल राजनीति के अखाड़े के माहिर पहलवान कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव को घेरने की कोशिश में जुटी भाजपा को खुद नेताजी ने अपना ही दांव सिखा दिया है। भाजपा अब नेताजी के दांव का इस्तेमाल उन्हीं पर कर सपा को मुसीबत में डालने की कोशिश में है। इस कोशिश की शुरुवात 26 […]
Author December 23, 2014 08:35 am
मुलायम सिंह यादव की तबियत बिगड़ी, मेदांता अस्पताल में भर्ती (फोटो: भाषा)

अंशुमान शुक्ल

राजनीति के अखाड़े के माहिर पहलवान कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव को घेरने की कोशिश में जुटी भाजपा को खुद नेताजी ने अपना ही दांव सिखा दिया है। भाजपा अब नेताजी के दांव का इस्तेमाल उन्हीं पर कर सपा को मुसीबत में डालने की कोशिश में है। इस कोशिश की शुरुवात 26 दिसंबर को नोएडा से होगी जहां भाजपा यादव सिंह के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर उत्तर प्रदेश के दो क्षेत्रीय दलों बसपा और सपा को घेरने की कोशिश करेगी।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की अगुआई में जनता परिवार से जुड़े सभी सदस्यों ने सोमवार को जंतर-मंतर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को घेरने की कोशिश की। प्रधानमंत्री पर वादाखिलाफी समेत तमाम आरोप मढ़े गए। राजनीति के जानकारों का कहना है कि ऐसा कर जनता परिवार भाजपा को खुद पर हमलावर होने से पहले उन्हें अपने तेवरों का इल्म कराना चाहता था। लेकिन उत्तर प्रदेश में यह दांव उलटा पड़ता नजर आ रहा है। भाजपा ने नोएडा विकास प्राधिकरण के कुबेर कहे जाने वाले मुख्य अभियंता यादव सिंह को आधार बनाकर प्रदेश की सपा की सरकार को घेरने की घोषणा की है। इसे शुरुआत माना जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यादव सिंह के बाद प्रदेश के कई प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग कर सपा और बसपा के कृपापात्र अफसरों को निशाना बनाकर भाजपा दोनों ही क्षेत्रीय दलों के खिलाफ मोर्चेबंदी शुरू कर सकती है।

कभी शिक्षा, साहित्य, कला, संगीत समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना कर इतराने वाला उत्तर प्रदेश आज भ्रष्टाचार की गिरफ्त से छूटने के लिए कसमसा रहा है। बसपा की सरकार के दौरान कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। लोकायुक्त ने ऐसे मंत्रियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की। उसकी पुनरावृत्ति सपा की सरकार में भी हो रही है। अब तक अखिलेश सरकार के दो मंत्री इस जद में आ चुके हैं और लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भी जांच की सिफारिश की है।

इन घटनाओं से उत्तर प्रदेश के विकास की असल तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाती है। इस मसले पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा- प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। नोएडा में यादव सिंह के प्रकरण ने जिस तरह तूल पकड़ा और उस पर मुख्यमंत्री की तरफ से कार्रवाई करने में जो देरी की गई, वह हैरान करने वाली है। यादव सिंह के प्रश्रयदाता कौन हैं? जनता इसका जवाब चाहती है। इसीलिए 26 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में भाजपा के सभी विधायक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संसदीय क्षेत्रों से चुनकर आए सांसद नोएडा में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सिर्फ यादव सिंह के खिलाफ प्रदर्शन करने भर की पार्टी की योजना नहीं है। प्रदेश के चिन्हित भ्रष्ट अधिकारियों और मंत्रियों से उनके विभागों का हिसाब मांगने की तैयारी है। सपा की सरकार बनने के बाद से केंद्र सरकार ने प्रदेश के विकास के मद में जितनी धनराशि निर्गत की, सरकार को सबका हिसाब देना होगा।

जंतर-मंतर से नरेंद्र मोदी को घेरने की जनता परिवार की कोशिशें आने वाले समय में कितना रंग लाती हैं, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन अभी मोदी की सरकार को घेरने के जिस रास्ते का इल्म जनता परिवार और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कराया है, उत्तर प्रदेश में भाजपा उसका इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ करने की रणनीति बना चुकी है। शुरुआत यादव सिंह को आधार बनाकर करने की तैयारी है। लेकिन यदि भाजपा अपनी इस मुहिम को गति देने में कामयाब हो गई तो उत्तर प्रदेश में सपा के लिए अगले सवा दो साल का वक्त आसान नहीं होगा।

 

 

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