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बंगाल के “विभीषण” बने मुकुल रॉय! घपले में फंसने पर तृणमूल ने किया था सस्पेंड, बीजेपी ने तुरंत था अपनाया

सितंबर 2017 में, रॉय को तृणमूल से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। जिसके कुछ ही दिनों बाद वो नवंबर में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए।

Bengal, Mamta Banerjee, TMCबीजेपी नेता मुकुल रॉय (Express Photo by Partha Paul/File)

बंगाल विधानसभा चुनाव में इसबार बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस की बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र तीन सीट पर चुनाव जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में मजबूती के साथ मैदान में है। बीजेपी के बढ़ते ग्राफ में अगर किसी नेता के योगदान की बात की जाए तो सबसे पहला नाम कभी ममता बनर्जी की पार्टी में नंबर 2 रहे मुकुल रॉय का आता है। मुकुल रॉय बंगाल के “विभीषण” बनकर उभरे हैं। उन्होंने बीजेपी के लिए इस चुनाव में नारा दिया है ‘इस बार 200 पार’।

66 वर्षीय मुकुल रॉय ने युवक कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की थी। 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी का निर्माण किया था तो मुकुल रॉय टीएमसी में शामिल हो गए थे। जिसके बाद मुकुल रॉय दिल्ली में पार्टी के प्रमुख चेहरे माने जाते थे। साल 2006 में उन्हें पार्टी का महासचिव और राज्यसभा के लिए भेजा गया। यूपीए 2 के दौरान मुकुल रॉय पहले राज्य मंत्री बनाए गए बाद में ममता बनर्जी के बंगाल के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद उन्हें रेलमंत्री बनाया गया।

हालांकि बाद में टीएमसी की तरफ से एफडीआई के मुद्दे पर केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। साल 2015 के बाद मुकुल रॉय और टीएमसी के रिश्ते में गिरावट की शुरुआत हो गयी। सारदा घोटाले और नारद स्टिंग ऑपरेशन में कथित रूप से मुकुल रॉय के शामिल होने की बात सामने आयी।

बाद में सितंबर 2017 में, रॉय को तृणमूल से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। जिसके कुछ ही दिनों बाद वो नवंबर में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले रॉय ने तब से राज्य में बीजेपी के आधार को मजबूत बनाने के लिए काम करना शुरू कर दिया। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सफलता के पीछे मुकुल रॉय का अहम योगदाना माना जाता है।

मुकुल रॉय के बीजेपी में जाने के बाद ही पिछले कुछ सालों में शुभेंदु अधिकारी, दिनेश त्रिवेदी, अर्जुन सिंह, राजीव बनर्जी, सौमित्र खान, भारती घोष, सव्यसाची दत्ता, अनुपम हाजरा, शोभन बनर्जी जैसे नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया।

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