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मुंबईः हर घर में पहुंचने की तैयारी में रिलायंस, खरीदने जा रही 30 नए ब्रॉन्ड, जानें विदेशी कंपनियों को कैसे मात देंगे मुकेश

रिलायंस की इस प्लानिंग को लेकर Ambit Capital के आलोक शाह का कहना है रिलायंस के लिए यह आसान नहीं होगा। क्योंकि पुराने बड़े ब्रांड की अपनी पहचान है, उन्हें टक्कर देना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती है।

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Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी अब घर-घर में रिलायंस की पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत लगभग 30 ऐसे लोकप्रिय उपभोक्ता ब्रांड को खरीदने को लेकर रिलायंस की बात चल रही है। यह बातचीत अंतिम चरण में है। इसके लिए रिलायंस एक नये वर्टिकल Reliance Retail Consumer Brands को आगे बढ़ा रही है।

दरअसल रिलायंस का टारगेट है कि वो हर में अपनी पहुंच बना चुके यूनिलीवर, पेप्सिको, नेस्ले और कोका कोला जैसी बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों को टक्कर दे सके। इसके लिए रिलायंस कंपनी ने ग्रॉसरी, हाउसहोल्ड और पर्सनल केयर से जुड़े करीब 50-60 ब्रांड का अगले 6 महीने में पोर्टफोलियो बनाने का प्लान बनाया है।

भारतीय अरबपति मुकेश अंबानी द्वारा संचालित रिलायंस 50-60 ब्रांड्स के पोर्टफोलियो बनाने के साथ उनके ‘मॉम-एंड-पॉप स्टोर’ और बड़े खुदरा दुकानों में उन्हें ले जाने के लिए वितरकों की एक टीम को काम पर रख रही है। खबर के मुताबिक अभी रिलायंस इंडिया के 30 पॉपुलर लोकल कंज्यूमर ब्रांड के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।

खबर है कि रिलायंस या तो इन कंपनी ब्रांड को पूरी तरह से खरीदेगी या फिर उनके साथ ज्वॉइंट वेंचर तैयार कर सकती है। जिसकी वजह से सेल में रिलायंस को हिस्सेदारी मिले। हालांकि रिलायंस इन ब्रांड की डील पर कितने करोड़ खर्चा करेगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। वहीं रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 5 साल में रिलायंस ने रिटेल बिजनेस का सालाना सेल टारगेट 500 अरब डॉलर सेट किया है। फिलहाल रिलायंस ने इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

दरअसल भारत में दशकों से काम कर रहे बड़े ब्रांड जैसे नेस्ले, यूनिलीवर, पेप्सिको इंक और कोका-कोला को रिलायंस चुनौती देना चाहती है। यूनिलीवर की भारतीय इकाई ने मार्च 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में $6.5 बिलियन की बिक्री की जानकारी दी। उसका दावा है कि भारत में 10 में से नौ परिवार उसके कम से कम एक ब्रांड का प्रयोग करते हैं।

वहीं रिलायंस की इस प्लानिंग को लेकर Ambit Capital के आलोक शाह का कहना है रिलायंस के लिए यह आसान नहीं होगा। क्योंकि पुराने बड़े ब्रांड की अपनी पहचान है, उन्हें टक्कर देना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में रिलायंस अगर बड़े ब्रांडों के विलय और अधिग्रहण पर काम करती है तो ये आसान हो सकता है।

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