मुकेश अंबानी को और मालामाल कर देगा यह नया कारोबार, अमेरिका की रिसर्च फर्म ने की बड़ी भविष्यवाणी

मुकेश अंबानी ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उतरने के साथ 4 गीगा फैक्ट्री लगाने की घोषणा की है। इस सेक्टर में रिलायंस इंडस्ट्रीज अगले तीन साल में 75 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी

RIL, Mukesh Ambani, Ravish Kumar
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः जसबीर मल्ही)

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी एक सफल कारोबारी है। मुकेश अंबानी जो भी कारोबार शुरू करते हैं, उसका सफल होना निश्चित हैं। टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इसका सबसे बड़ा सबूत है। हाल ही में मुकेश अंबानी ने ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में उतरने की घोषणा की है। इसकी सफलता को लेकर अभी से भविष्यवाणी होने लगी है।

अमेरिका की रिसर्च एंड ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टेन रिसर्च ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का ग्रीन एनर्जी कारोबार अगले 5 सालों में सफलता के नए आयाम बनाएगा। अमेरिकी रिसर्च फर्म का कहना है कि पांच साल में रिलायंस के इस नए ग्रीन एनर्जी कारोबार की वैल्यू बढ़कर 36 बिलियन डॉलर करीब 2.6 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगी। अमेरिकी फर्म की रिपोर्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा तो वित्त वर्ष 2026 के रिलायंस के कुल एबिटा में ग्रीन एनर्जी कारोबार की करीब 10% हिस्सेदारी होगी।

ये है मुकेश अंबानी की योजना: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पिछले महीने आयोजित एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में ग्रीन एनर्जी कारोबार शुरू करने की घोषणा की थी। इस कारोबार में रिलायंस 75 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसमें से 60 हजार करोड़ रुपए 4 गीगा फैक्ट्री को स्थापित करने पर खर्च होंगे। इन फैक्ट्री में सोलर, बैटरी, फ्यूल सेल और इलेक्ट्रोलाइजर का उत्पादन किया जाएगा। यह सभी फैक्ट्री गुजरात के जामनगर में लगाई जाएंगी। रिलायंस की योजना 2030 तक 100 गीगावाट सोलर एनर्जी की क्षमता तैयार करना है।

रिलायंस को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा: रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले भी कई तेल कंपनियों ने क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बनने की कोशिश की, लेकिन वे सभी विफल रहीं। रिलायंस का मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस काफी अलग है और संभावना है कि इसमें ज्यादा मार्जिन मिल सकता है। लेकिन क्लीन एनर्जी में सीमित मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता रिलायंस के सामने बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए रिलायंस को नए साझेदार तलाशने होंगे। यह साझेदार फ्यूल सेल और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।

रणनीति से मिलेगी सफलता: बर्नस्टेन रिसर्च ने कहा है कि ग्रीन एनर्जी कारोबार में रिलायंस की सफलता को लेकर अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन कंपनी की खास रणनीति की वजह से सफल होने की ज्यादा संभावना है। रिलायंस ने खुद एनर्जी उत्पादन के बजाए इससे जुड़े उपकरणों के निर्माण पर फोकस किया है। यह रणनीति उसे सफलता दिला सकती है। रिलायंस ने सोलर पावर में निवेश के बजाए सोलर पीवी पैनल और ग्रीन एनर्जी स्टोरेज के उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग की रणनीति बनाई है।

ग्रीन एनर्जी पर अरबों डॉलर खर्च होंगे: रिपोर्ट में कहा गया है कि मुकेश अंबानी ने ग्रीन एनर्जी कारोबार में उतरने का फैसला ऐसे ही नहीं किया है। अगले तीस सालों में ग्रीन एनर्जी अपनाने के लिए दुनियाभर के देश 70 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि खर्च करेंगे। भारत ने भी जीरो कार्बन का लक्ष्य तक कर दिया है। ग्रीन एनर्जी को अपनाने पर होने वाले अरबों डॉलर के इस खर्च में से बड़ी हिस्सेदारी जुटाने पर ही मुकेश अंबानी की नजर है।

अपडेट