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15 साल पहले अंबानी भाइयों की नेटवर्थ थी 7 अरब डॉलर, बंटवारे के बाद मुकेश अंबानी की संपत्ति नौ गुना बढ़ी, टेलिकॉम में बड़े के आते ही छोटा भाई कंगाल

2008 तक दोनों भाई संपत्ति के मामले में लगभग बराबरी पर थे लेकिन 2009 में आयी वैश्विक मंदी का असर दोनों भाईयों के कारोबार पर भी पड़ा। हालांकि मुकेश अंबानी इससे जल्द उबर गए लेकिन अनिल अंबानी की संपत्ति में शुरू हुआ गिरावट का दौर तब से बदस्तूर जारी है।

mukesh ambani anil ambani reliance jio15 साल में नौ गुना बढ़ी मुकेश अंबानी की संपत्ति, अनिल अंबानी अरबपतियों की लिस्ट से ही बाहर हुए। (रायटर्स/फाइल इमेज)

साल 2006 में एक वक्त ऐसा भी आया था, जब अनिल अंबानी की कुल संपत्ति बड़े भाई मुकेश अंबानी से भी ज्यादा थी लेकिन आज स्थिति ये है कि मुकेश अंबानी जहां दुनिया के पांचवे सबसे अमीर बिजनेसमैन बन गए हैं। वहीं अनिल अंबानी दिवालिया होने के कागार पर हैं। मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति इन दिनों 77 अरब डॉलर हो गई है, जबकि अनिल अंबानी पिछले साल ही अरबपतियों की लिस्ट से बाहर हो गए हैं और इस वक्त उनकी कुल संपत्ति एक अरब डॉलर से भी कम रह गई है।

बंटवारे के वक्त दोनों भाइयों की संपत्ति में नहीं था ज्यादा अंतरः साल 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद मुकेश अंबानी ने कंपनी के चेयरमैन और अनिल अंबानी ने एमडी का पद संभाला था। साल 2004 में दोनों भाइयों के बीच संपत्ति को लेकर झगड़ा और साल 2005 में दोनों के बीच बंटवारा हो गया था। उस वक्त दोनों भाईयों की कुल संपत्ति 7 अरब डॉलर थी। अब बंटवारे के 15 साल बाद दोनों भाईयों की नेटवर्थ में जमीन आसमान का फर्क आ गया है।

बंटवारे के बाद से अब तक मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 9 गुना बढ़ी है। दोनों भाईयों के बीच बंटवारे के बाद मुकेश अंबानी के हिस्से में मुख्य तौर पर पेट्रोकेमिकल का बिजनेस आया। वहीं छोटे भाई अनिल अंबानी के पास रिलायंस कम्यूनिकेशन और रिलायंस कैपिटल, एनर्जी का बिजनेस आया।

2008 तक दोनों भाई संपत्ति के मामले में लगभग बराबरी पर थे लेकिन 2009 में आयी वैश्विक मंदी का असर दोनों भाईयों के कारोबार पर भी पड़ा। हालांकि मुकेश अंबानी इससे जल्द उबर गए लेकिन अनिल अंबानी की संपत्ति में शुरू हुआ गिरावट का दौर तब से बदस्तूर जारी है। अनिल अंबानी कर्ज के जाल में फंस चुके हैं और अब वह दिवालिया होने के कागार पर पहुंच गए हैं।

मुकेश अंबानी के टेलीकॉम में आने से अनिल को हुआ सबसे ज्यादा नुकसानः बंटवारे के वक्त दोनों भाईयों के बीच समझौता हुआ था कि दोनों एक दूसरे के बिजनेस में नहीं उतरेंगे लेकिन साल 2010 में यह समझौता खत्म होने के बाद मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कम्यूनिकेशन के क्षेत्र में कदम रखा और रिलायंस जियो के साथ धमाकेदार एंट्री ली। आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जियो के आने से सबसे ज्यादा नुकसान अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशन को ही उठाना पड़ा है।

बता दें कि साल 2016 में रिलायंस जियो जब लॉन्च हुई थी तो उसके कुछ दिनों बाद यानि कि सितंबर माह में जियो के यूजर्स की संख्या 1.59 करोड़ थी। वहीं रिलायंस कम्यूनिकेशन के यूजर्स की संख्या 8.71 करोड़ थी। उस वक्त अनिल अंबानी की कंपनी का मार्केट शेयर 8 फीसदी से ज्यादा था, जबकि जियो के पास सिर्फ 1.52 फीसदी मार्केट शेयर था। आज साल 2020 में स्थिति ये है कि जियो का मार्केट शेयर बढ़कर 33 फीसदी से ज्यादा हो गया है और उसके यूजर्स की संख्या भी बढ़कर करीब 39 करोड़ पहुंच गई है।

इसके उलट अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशन का मार्केट शेयर गिरकर 0.002 फीसदी रह गया है और उसके यूजर्स की संख्या सिर्फ 18 हजार के करीब है। आज अनिल अंबानी पर एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। वहीं मुकेश अंबानी हाल ही में पूरी तरह से कर्जमुक्त हो चुके हैं। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले ग्रुप की मार्केट वैल्यू जहां बढ़कर 12 लाख करोड़ से ज्यादा हो गई है, वहीं अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनियों की मार्केट वैल्यू गिरकर 2 हजार करोड़ रुपए से भी कम हो गई है।

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