राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं की नई सोशल साइंस की किताब मंगलवार को जारी की है। इस किताब में सिख गुरुओं पर मुगलों के अत्याचार का जिक्र है। ‘Understanding Society India and Beyond-Part 2’ नाम के शीर्षक वाली इस किताब के एक चैप्टर में कहा गया है कि सिख गुरुओं के खिलाफ मुगल शासन की क्रूरता जैसी मिसालें इतिहास में बहुत कम हैं।

किताब में सिखों के गुरु अर्जन देव, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के मुगलों की क्रूरता का जिक्र है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में राजनीतिक कारणों के साथ-साथ धार्मिक और भेदभावपूर्ण नीतियां भी थीं।

शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 6 महीने बाद जारी हुई किताब

NCERT ने इस किताब को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के करीब छह महीने बाद मंगलवार को जारी किया। किताब के ‘Resistance and Resilience’ अध्याय में सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में हुए विभिन्न आक्रमणों, संघर्षों और प्रतिरोध आंदोलनों का वर्णन किया गया है।

गुरु अर्जन देव की शहादत का जिक्र

पाठ्यपुस्तक में मुगल सम्राट जहांगीर और गुरु अर्जन देव के बीच हुए संघर्ष का भी उल्लेख है। इसमें बताया गया है कि जहांगीर ने अपने बेटे और विद्रोही खुसरो मिर्जा का कथित समर्थन करने के आरोप में गुरु अर्जन देव को मृत्युदंड देने का आदेश दिया था। किताब इस घटना को सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताती है।

गुरु हरगोबिंद को नजरबंद किए जाने का जिक्र

इसके बाद सिख समुदाय के संगठनात्मक और राजनीतिक स्वरूप में आए बदलाव का भी जिक्र किया गया है। पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि मुगल सम्राट जहांगीर ने गुरु हरगोबिंद को ग्वालियर किले में नजरबंद किया था। बड़ी संख्या में सिख उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए किले के बाहर पहुंचते थे।

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत

किताब में नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर की शहादत को भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना बताया गया है। इसमें कहा गया है कि 1675 में औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड देने का आदेश दिया था। पाठ्यपुस्तक के मुताबिक, उनकी शहादत के बाद सिख समुदाय में प्रतिरोध और संगठन की भावना और मजबूत हुई।

अकाल तख्त की स्थापना का भी उल्लेख

किताब में गुरु हरगोबिंद द्वारा अकाल तख्त की स्थापना का भी उल्लेख है। इसके साथ ही बताया गया है कि बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और मुगल शासन के साथ बढ़ते तनाव के बीच सिख समुदाय में सामूहिक संगठन और सैन्य प्रतिरोध की प्रवृत्ति मजबूत हुई।

पाठ्यपुस्तक के अनुसार, गुरुओं की शहादत ने सिख समुदाय के भीतर उत्पीड़न का सामना दृढ़ता और प्रतिरोध के साथ करने की भावना को मजबूत किया। इसमें यह भी कहा गया है कि राजनीतिक दबाव और उत्पीड़न का सामना सामूहिक संगठन और जरूरत पड़ने पर सशस्त्र प्रतिरोध के माध्यम से किया गया।

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