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पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर MP के वित्त मंत्री बोले, “हमें जनता की पीड़ा का अहसास है”

नीति आयोग द्वारा राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों पर कर घटाने की सलाह के बीच मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने आज कहा कि इन ईंधनों की बढ़ती कीमतों से जनता की पीड़ा का राज्य सरकार को अहसास है।

Author नई दिल्ली | May 25, 2018 4:45 PM
पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से जनता परेशान

नीति आयोग द्वारा राज्यों को पेट्रोलियम पदार्थों पर कर घटाने की सलाह के बीच मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने आज कहा कि इन ईंधनों की बढ़ती कीमतों से जनता की पीड़ा का राज्य सरकार को अहसास है। हालांकि, उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों पर राज्य सरकार के वसूले जाने वाले मूल्य संर्विधत कर (वैट) और अन्य कर-उपकरों में शीघ्र कटौती को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया। नीति आयोग की ताजा सलाह का हवाला देते हुए ने मलैया से पूछा कि क्या प्रदेश सरकार इसे शीघ्र मानने पर विचार करेगी। इस प्रश्न पर उन्होंने कहा, “पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण जनता की पीड़ा का हमें पूरा अहसास है। यह देखकर हमें भी पीड़ा होती है।” वित्त मंत्री ने कहा, “चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते जा रहे हैं।

इसलिये इन पर देश में कर वसूली भी बढ़ती जा रही है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम और बढ़ जाएं। लिहाजा हमें लगता है कि इस सिलसिले में जनता को राहत देने के लिये किसी न किसी स्तर पर कुछ न कुछ कदम उठाया जाना चाहिये।” यह पूछे जाने पर कि क्या प्रदेश सरकार निकट भविष्य में पेट्रोलियम पदार्थों पर कर घटाकर जनता को महंगाई से राहत देगी, उन्होंने सीधा जवाब टालते हुए कहा, “इस मामले में अलग-अलग स्तरों पर चर्चा चल रही है। देखिये, आगे क्या होता है। अगर हमें केंद्र सरकार से कुछ निर्देश मिलते हैं, तो हम देखेंगे।” बहरहाल, पेट्रोलियम पदार्थों पर कर वसूली से राज्य सरकार को मोटा राजस्व प्राप्त होता है और सरकारी खजाने की सेहत को देखते हुए उसके लिये इन पर कर घटाने का शीघ्र फैसला करना इतना आसान भी नहीं है।

वाणिज्यिक कर विभाग के सूत्रों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा पेट्रोल पर 28 प्रतिशत और डीजल पर 22 प्रतिशत वैट वसूला जा रहा है। वैट के अलावा प्रदेश सरकार के ही स्तर पर पेट्रोल पर चार रुपये प्रति लीटर के हिसाब से अतिरिक्त कर और एक प्रतिशत की दर से उपकर भी लगाया जा रहा है। इसी तरह राज्य सरकार द्वारा डीजल पर वैट के अलावा 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से अतिरिक्त कर और एक प्रतिशत की दर से उपकर वसूला जा रहा है।

इस बीच, सूबे में इस साल के आखिर में होने वाले चुनावों के मद्देनजर पेट्रोलियम पदार्थों पर ऊंची कर वसूली को लेकर सियासत तेज हो रही है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, “जब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार थी, तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के अन्य नेता पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि पर विरोध जताने के लिये साइकिल से अपने दफ्तर जाने का सियासी नाटक करते थे। लेकिन आज जब एनडीए सरकार के मौजूदा राज में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के आसमान छूने से आम आदमी त्राहि-त्राहि कर रहा है, तो इन भाजपा नेताओं ने चुप्पी साधते हुए अपनी साइकिलें छिपा दी हैं।” उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर अपने करों की ऊंची दरों को बिना किसी देरी के घटाना चाहिये।

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