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एमपीः करप्शन से आजिज IAS ने मांगी सरकार से डेपुटेशन, पर चैट लीक हुई तो मिल गया नोटिस

मध्य प्रदेश में एक आईएएस अधिकारी को एक निजी सोशल मीडिया ग्रुप पर राज्य के नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद सरकार ने कारण बताओ नोटिस भेजा है।

लोकेश जांगिड़ ने सरकार से डेपुटेशन मांगी है। (स्रोत: फेसबुक)।

मध्य प्रदेश में एक आईएएस अधिकारी को एक निजी सोशल मीडिया ग्रुप पर राज्य के नौकरशाहों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद सरकार ने कारण बताओ नोटिस भेजा है। दरअसल, आईएएस अधिकारियों के एक ग्रुप की चैट लीक हो गयी थी। आईएएस अधिकारी लोकेश जांगिड़ ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए गृह राज्य महाराष्ट्र में तीन साल की डेपुटेशन की मांग की है। लेकिन लीक चैट में उन्होंने संकेत दिया कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने में असमर्थता के कारण उनका बार-बार तबादला किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि साढ़े चार साल में, उनका नौ बार तबादला हुआ है।

राज्य सरकार ने “अनुशासनहीनता” के लिए अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने नोटिस की पुष्टि करते हुए कहा कि तबादला और तैनाती नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया हैं। मंत्री ने कहा, “इन्हीं अधिकारी का तबादला कांग्रेस के शासनकाल में भी हुआ था, तो अब वह कांग्रेस को इतने प्रिय कैसे हो गए? कोई अधिकारी व्यवस्था से बड़ा नहीं है। प्रत्येक अधिकारी को सिविल सेवा नियमों का पालन करना पड़ता है, जिनका संबंधित अधिकारी द्वारा उल्लंघन किया गया है। ”

विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमलावर होते हुए दावा किया कि अधिकारी जांगिड़ का तबादला बड़वानी से कोविड महामारी के दौरान चिकित्सा उपकरणों की खरीद में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए किया गया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि मुख्यमंत्री और जिम्मेदार मंत्री और नौकरशाह सफाई दें। ग्रुप में अपने एक पोस्ट में, जांगिड़ ने लिखा है, “बिहार में वे किसी को भी डीएम नहीं बनाते हैं जो नोट छापता है। मप्र में, जितना कम कहा जाए उतना अच्छा है।”

एक अन्य पोस्ट में मध्य प्रदेश में कार्यकाल की स्थिरता और सिविल सेवा बोर्ड नामक संस्था का मजाक बनाया गया है। एक पोस्ट में लिखा है, “दिलचस्प बात यह है कि जो लोग हर तरह के माफिया से पैसा लेते हैं, उनका एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आसानी से ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन ईमानदार अधिकारी सचिवालय में फेंक दिए जाते हैं।”

लोकेश जांगिड़ ने सेवानिवृत्ति के बाद “सभी के सामने तथ्यों को लाने” के लिए एक किताब लिखने के अपने इरादे की भी घोषणा की। जांगिड़ का पिछला ट्रांसफर बड़वानी जिले के अपर कलेक्टर पद से 31 मई को भोपाल के राज्य शिक्षा केंद्र में अतिरिक्त मिशन निदेशक के पद पर हुआ था।

2014 बैच के आईएएस अधिकारी ने लिखा है कि बड़वानी के वर्तमान जिला कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनके हितों में बाधा डालने के कारण तबादला किया गया। उन्होंने बताया मुख्यमंत्री और कलेक्टर दोनों किरार समुदाय से हैं। उनकी पत्नियां किरार महासभा की पदाधिकारी थीं। नौकरशाह ने अपने वरिष्ठों के लिए भी कड़ी आलोचना की है।

इन पोस्टों को लेकर एक वरिष्ठ नौकरशाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिन्होंने उन्हें “कुछ शालीनता” रखने और अपने सभी पोस्ट हटाने की सलाह दी। जांगिड़ ने मना कर दिया और कहा कि वे उन्हें समूह से हटा सकते हैं। बाद में अधिकारी को ग्रुप से हटा दिया गया।

अधिकारी ने बताया, “मैंने पारिवारिक चिंताओं को लेकर महाराष्ट्र में तीन साल के लिए अंतर कैडर डेपुटेशन का अनुरोध किया है।” जांगिड़ ने कहा, “ट्रांसफर और पोस्टिंग हर सरकार का विशेषाधिकार है। मुझे सरकार के बारे में शिकायत करने के लिए कुछ भी नहीं है। एसडीएम-विजयपुर के रूप में मेरी पहली पोस्टिंग के बाद से मेरे फील्ड असाइनमेंट श्योपुर जिले में मुझे बहुत संतुष्टि मिली है, विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के साथ काम करने की संतुष्टि।”

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