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कमलनाथ ने पूछा- कौन सी सर्जिकल स्ट्राइक? इंदिरा गांधी ने तो 90,000 पाकिस्तानी जवानों का सरेंडर कराया था, उसकी बात क्यों नहीं करते?

कमलनाथ ने नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज ये राष्ट्रवाद की बात करेंगे। कौन सा पाठ पढ़ा है इन्होंने राष्ट्रवाद का।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। (Photo: PTI)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब इंदिरा गांधी की सरकार थी, 90 हजार पाकिस्तानी जवानों ने सरेंडर किया था। याद है ये सब बातें। ये उसकी बात नहीं करेंगे। कहते हैं मैंने सर्जिकल स्ट्राइक की। कौन सी सर्जिकल स्ट्राइक की? देश को इसके बारे में खुलकर बताइए। आज ये राष्ट्रवाद की बात करेंगे। कौन सा पाठ पढ़ा है इन्होंने राष्ट्रवाद का।”

दरअसल सीएम कमलनाथ गुरूवार (20 फरवरी) को राज्य के छिंदवाड़ा में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि शिवराज श्रेय लेने की राजनीति करते हैं और उनका मुंह बहुत चलता है।

इससे पहले कमलनाथ ने कहा था कि उनकी सरकार प्रदेश में राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) लागू नहीं करेगी। उन्होंने कहा था  ‘‘मध्यप्रदेश में वह वर्तमान में एनपीआर लागू नहीं करने जा रहे।’’ उन्होंने कहा कि एनपीआर की जिस अधिसूचना की बात की जा रही है, वह 9 दिसम्बर 2019 की है। इस अधिसूचना के बाद केंद्र की सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) बनाया, अर्थात जो एनपीआर अधिसूचित किया गया है, वह सीएए, 2019 के तहत नहीं किया गया है। कमलनाथ ने कहा था कि अधिसूचना नागरिकता कानून -1955 की नियमावली-2003 के नियम 3 के तहत जारी की गई।

मध्यप्रदेश विधानसभा के 16 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र में पेश किये जाने वाले बजट की तैयारियों के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि हमें पारम्परिक बजट निर्माण की प्रक्रिया से अलग हटकर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और नवाचारी विचारों पर काम करने की जरूरत है।

कमलनाथ ने कहा, ‘‘विश्व का आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इसलिए वित्तीय संस्थाओं और वित्त की व्यवस्था करने वाली सरकारों को भी अपनी सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में महत्वाकांक्षी युवाओं का बड़ा समुदाय है और उसकी महत्वाकांक्षाएँ पूरी करने के लिए ज्यादा बजट संसाधनों की जरूरत है।

कमलनाथ ने कहा, ‘‘बदले हुए और लगातार बदल रहे भारत और भारतीय राज्यों के लिए वित्तीय व्यवस्थाएँ करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसलिए बैंकों, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्रों को परिवर्तन के साथ स्वयं को बदलने की और परिवर्तनों को अपनाने की आवश्यकता है। इसलिए पारम्परिक बजट निर्माण की प्रक्रिया से अलग हटकर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और नवाचारी विचारों पर काम करने की जरूरत है।’’ (भाषा इनपुट के साथ)

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