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सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सांसदों को किया ब्रीफ, लेकिन नहीं पूछने दिया एक भी सवाल

सर्जिकल स्ट्राइक पर बात करने के लिए आर्मी ने शुक्रवार (14 अक्टूबर) को एक ब्रीफिंग की। ब्रीफिंग संसदीय समिति के लिए रखी गई थी।
भारतीय सेना ने 29 सितंबर को पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की जानकारी दी थी। (Source: AP Photo/File)

 

 

सर्जिकल स्ट्राइक पर बात करने के लिए आर्मी ने शुक्रवार (14 अक्टूबर) को एक ब्रीफिंग की। ब्रीफिंग संसदीय समिति के लिए रखी गई थी। जिसमें सभी पार्टी के कुछ सांसद मौजदू थे। ब्रीफिंग का नेतृत्व आर्मी के सबसे सीनियर अधिकारियों में नंबर दो की पोजिशन रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने किया था। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सासंदों को सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ा कोई भी सवाल करने ही नहीं दिया गया। ब्रीफिंग भी 15 मिनट में खत्म कर दी गई। वहीं मीटिंग के एजेंडे को लेकर भी विवाद हुआ था। इसके लिए संसदीय समिति की सदस्य अंबिका सोनी और मधुसुदन मिस्त्री ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। बताया गया कि पहले मीटिंग का अजेंडा था कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के प्रतिनिधि सर्जिकल स्ट्राइक पर बात करेंगे। लेकिन बाद में इसे बदलकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बने आंतकी कैंप को हटाने के लिए बातचीत करने तक सीमित कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन के बाद फिर से एजेंडा बदला गया।

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इसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने पूरे ऑपरेशन के बारे में थोड़ा विस्तार से बताया। इसमें बताया गया कि आतंकी कैंपों को कितना नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि, ज्यादा जानकारी देने और सवाल ना पूछने देने के विवाद पर रिटायर्ड मेजर जनरल बीसी खंडूरी ने कहा कि मीटिंग सिर्फ ब्रीफिंग के लिए रखी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि मिशन के ‘टॉप सीक्रेट’ होने की वजह से सवाल-जवाब का सेशन नहीं रखा जा सकता था।

ब्रीफिंग में कहा गया कि सेना ने काफी आगे की सोचकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वक्त में अगर जरूरत पड़ी तो ऐसी और स्ट्राइक भी की जा सकती हैं।

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