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कांग्रेसी प्रत्याशियों पर चुनाव आयोग ने कसा शिकंजा, आईटी छापे में मिली रसीदों की CBDT से करा रहा पुष्टि

इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अपने खर्चों को गलत तरीके से दिखाया था।

ECतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

चुनाव आयोग (EC) अपने केस को मजबूत बनाने के लिए दो कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के पास पहुंचा है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अपने खर्चों को गलत तरीके से दिखाया था। आयोग ने CBDT को अप्रैल में मुख्य रूप से उनके रिश्तेदारों के ठिकानों और मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहयोगियों के ठिकानों पर हुई आयकर छापे के दौरान बरामद की गई नकदी रसीदें ‘प्रमाणित’ करने को कहा है। आयोग ने सीबीडीटी से ऐसा तब कहा जब कांग्रेस प्रत्याशी कल्पना वर्मा और शिवजीत सिंह ‘भईया राजा’ ने चुनाव संबंधी खर्चों के लिए दस-दस लाख रुपए लेने की बात से इनकार कर दिया।

जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने 17 मई को बताया कि वर्मा और राजा, जिन्होंने रायगून और पन्ना से चुनाव लड़ा, दोनों के खिलाफ मध्य प्रदेश मुख्य चुनाव अधिकारी ने 14 मई को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई आयकर अधिकारियों द्वारा छापे की रिपोर्ट पर आधारित थी।

आईटी विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक उनकी टीम ने भैया राजा और वर्मा को भुगतान की गई रकम की रसीदें खोजीं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने दस-दस लाख रुपए लिए। चुनाव आयोग ने अपने नोटिस में कहा, धनराशि, उनके द्वारा आयोग को भेजे गए अंतिम खातों में दर्ज नहीं हुई, जो कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 10 ए के तहत मानदंडों का उल्लंघन है।

हालांकि चुनाव आयोग के भेजे अपने जवाब में दोनों नेताओं वर्मा और राजा ने आरोपों को निराधार बताया है। आयोग ने अब दोनों नेताओं का सबूतों के आधार पर सामना करने की योजना बनाई है। हालांकि इससे पहले छापे के दौरान बरामद कैश रसीदों को प्रमाणित करने के लिए इसे सीबीडीटी की जरूरत है।

बता दें कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 10 ए चुनाव खर्चों के खाते की पैरवी करने में विफलता से संबंधित है। अगर निर्वाचित या उम्मीदवार समय के भीतर और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित तरीके से अपने खर्चों का लेखा-जोखा दर्ज नहीं करते हैं, तो दोषी साबित होने पर उन्हें आदेश की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

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