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छात्रों की आत्महत्याओं के मामले में समिति बनाने का एलान

मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रदेश में परीक्षाओं के तनाव और स्कूलों में पढ़ाई के दबाव के चलते पिछले कुछ दिनों से विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की बढ़ रही घटनाओं में मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री के सुझाव पर विधानसभा अध्यक्ष डा सीतासरन शर्मा ने पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की एक समिति गठित करने की घोषणा की..

Author भोपाल | March 5, 2016 1:05 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रदेश में परीक्षाओं के तनाव और स्कूलों में पढ़ाई के दबाव के चलते पिछले कुछ दिनों से विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की बढ़ रही घटनाओं में मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री के सुझाव पर विधानसभा अध्यक्ष डा सीतासरन शर्मा ने पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की एक समिति गठित करने की घोषणा की जो इस मुद्दे पर विषय विशेषज्ञों से व्यापक विचार विमर्श कर अपना प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करेगी। कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत और आरिफ अकील ने प्रदेश में मानसिक तनाव और स्कूलों में पढ़ाई के दबाव के कारण विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया।

इस मामले में सदन में चर्चा में शामिल होते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अच्छे अंकों के लिए विद्यार्थियों पर दबाव बनाने में स्कूल, शिक्षक और इसके साथ ही उसके माता-पिता भी दोषी हैं। स्कूल की साख बनाने के लिए स्कूल, प्रबंधन और शिक्षक बच्चों पर अंकों का दबाव बनाते है। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा पद्धति ने बच्चों के जीवन की स्वाभाविकता छीन ली है और वह दबाव में आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों पर अच्छे अंकों का दबाव बनाया जाना सामाजिक अपराध है। तनाव रहित शिक्षा आज समय की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था और समाज की सोच में परिवर्तन किया जाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘प्रतिभा नंबरों से नहीं आती है। उन्होंने दुनिया के महान वैज्ञानिकों, समाज-सेवियों, राजनीतिज्ञों और खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा अंकों में नहीं आंकी जा सकती थी और वे पढ़ने में भी बहुत अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी उपलब्धियों से दुनिया की धारा बदली।

चौहान ने सुझाव दिया कि सदन में पक्ष और विपक्ष की एक समिति गठित की जाए जो इस विषय पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और विचार विमर्श कर एक प्रतिवेदन दे। उन्होंने कहा कि समिति के निष्कर्षों को सरकार लागू करेगी। चौहान के सुझाव पर विधानसभा अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष के नेता और प्रतिपक्ष के नेता से सलाह के बाद समिति के सदस्यों की घोषणा करने की व्यवस्था दी।

मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में कुछ तात्कालिक सुधारों की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में 9वीं कक्षा से बच्चों, पालकों और शिक्षकों की काउंसलिंग कराने की व्यवस्था होगी। खेल बच्चों को दबावमुक्त करते हैं इसलिए स्कूलों में खेल पीरियड अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में योग और ध्यान की शिक्षा बच्चों को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं के साथ ही प्रदेश में व्यावसायिक प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी ताकि रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें।

इसके पहले ध्यानाकर्षण सूचना का उत्तर देते हुए प्रदेश के स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी ने सदन में बताया कि भोपाल के डीपीएस स्कूल के 11वीं के छात्र आदित्य, केंपियन स्कूल भोपाल के 9वीं कक्षा के छात्र सुमित मोहे, दमोह जिले के हटा की रहने वाली जबलपुर के मिलेनियम स्कूल की 10वीं की छात्रा नैनसी द्वारा आत्महत्या करने की जानकारी सदन को दी।

जोशी ने कहा कि पुलिस विभाग की उपलब्ध जानकारी के अनुसार परीक्षा में अनुर्त्तीण रहने के कारण 2012 में प्रदेश में 193, 2013 में 218 और 2014 में 223 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 2007 से ही जनवरी से जून के बीच की अवधि में हेल्पलाइन सेवा संचालित की जाती है। हर साल लगभग 25 से 30 हजार विद्यार्थियों द्वारा इस सेवा का उपयोग किया जाता है। इसमें विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा से संबंधित प्रश्न और विभिन्न मानसिक, मनोवैज्ञानिक, व्यक्तिगत, प्रवेश आदि संमस्याओं का समाधान किया जाता है।

जोशी ने बताया कि इसके अलावा मुख्यमंत्री ने रेडियो पर परीक्षा पूर्व अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों पर ज्यादा जोर न डालें। इससे बच्चे की स्वाभाविक तैयारी पर फर्क पड़ता है। बच्चों को नैतिक संबल दें। इससे पहले कांग्रेस के रावनिवास रावत और आरिफ अकील ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि विद्यार्थी परीक्षा में कम नंबर आने पर या माता-पिता व शिक्षक की डांट से मानसिक तनाव उत्पन्न होने के कारण आत्महत्या के प्रयास आदि कर रहे हैं।

विगत 5 साल का अवलोकन किया जाए तो प्रदेश के लगभग 1000 से अधिक विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है, लेकिन शासन द्वारा प्रदेश के स्कूलों में एक पीरियड ऐसा लगाने की कार्यवाही नहीं की गई जिसमें उन्हें बताया जाए कि विद्यार्थी परीक्षा में फेल होने, कम अंक आने, माता-पिता व शिक्षकों की डांट का गलत अर्थ न निकालें बल्कि उससे प्रेरित होकर और आगे अच्छी पढ़ाई करें न कि आत्महत्या करें।

उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में प्रदेश में विद्यार्थियों द्वारा खुदकुशी करने की घटनाएं बढ़ी हैं लेकिन शासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। इससे प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों में शासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।

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