शिकायत निवारण के लिए तैयार किए गए उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एससीडीआरसी) समेत जिलों और राज्यों के आयोग खुद ही उपभोक्ताओं की संख्या के बोझ तले दबते जा रहे हैं। ये हालात केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्य व जिला स्तर पर शिकायतों के आंकड़े में भी सामने आई है। इस समय देश भर में उपभोक्ताओं की तरफ से दर्ज शिकायतों का आंकड़ा 5.74 लाख से अधिक पहुंच गया है। इन मामलों को अभी भी अपने मामलों के निपटारे का इंजार है। केद्र सरकार ने हाल ही में संसद में यह रपट पेश की है।
उपभोक्ता संबंधित मामलों की शिकायतों के लिए केंद्र सरकार ने केंद्र से लेकर जिला स्तर पर उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग गठित किए हैं। जहां पर कोई भी नागरिक सीधे जाकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकता है और उसका निदान सरकारी संस्थाओं के पास होता है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री बी एल वर्मा के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 की धारा 38 (7) के तहत ऐसे विवादित मामलों का निपटारा करती है। यदि शिकायत में वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता नहीं तो विरोधी पक्ष से नोटिस मिलने के बाद तीन माह की समय सीमा में और परीक्षण की आवश्यकता होने पर पांच माह के भीतर मामले को निपटारा करने का प्रावधान है।
कुछ राज्यों में 100 फीसदी मामले निपटा दिए गये हैं
जनवरी 2026 तक मंत्रालय के पास विभिन्न तीन श्रेणियों में कुल 574333 मामले लांबित हैं। दावा किया है कि ई जागृति पोर्टल आने के बाद से भौतिक कार्यवाही पर निर्भरता कम कर दी है और न्याय वितरण में तेजी आई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (एनसीडीआरसी) और चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, पुद्दुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तराखंड के राज्यों आयोगों में जुलाई 2025 तक के सौ फीसद मामले निपटाए जा चुके हैं।
वर्ष 2025 में कुल 162474 मामले दर्ज किए गए थे और इनमें से से 150197 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। जो वर्ष 2024 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है। इसके अतिरिक्त 572 प्रवासी भारतीयों ने दिसंबर 2025 तक ई जागृति पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
जनवरी 2025 से केंद्र सरकार ने ई जागृति पोर्टल की शुरूआत की है ताकि ऐसे बढ़ते मामलों की संख्या में कमी लाई जा सके। इस पोर्टल पर कहीं से भी किसी भी भाषा में शिकायत दर्ज की जा सकती है। और इसकी मदद से सरकार ने वर्चुअल अदालत कक्ष देने की भी कोशिश की है ताकि कोई भी कहीं से भी आसानी से सुनवाई में शामिल हो सके। इसके अतिरिक्त वीडियो कांफ्रेंस के माध्मय से भी मामले सुनकर इनके निपटारे की व्यवस्था की जा रही है। इस समय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (एनसीडीआरसी) की दस और राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों (एसडीसीआरसी) की 35 में यह सुविधा शुरू की जा चुकी है।
राज्यों व जिलों में खाली पड़े हैं जरूरी पद
देश भर के तकरीबन सभी राज्यों में इन आयोग से संबंधित जरूरी पद खाली पड़े हैं। इन पदों में राज्यों आयोगों और जिला आयोगों के अध्यक्ष व सदस्यों के पद शामिल है। माना जा रहा है कि ये पद भरे होते तो प्रक्रिया में सरकारी तंत्र ओर तेजी ला सकता था। रपट में बताया गया है कि देश भर में राज्य आयोग में अध्यक्ष 18 अध्यक्ष व 75 सदस्य के पद खाली है। जबकि जिला आयोग में यह हालत और भी खराब है। इस श्रेणी में 169 अध्यक्ष और 379 सदस्यों के पद खाली पाए गए हैं।
किस श्रेणी में लटके हैं कितने मामले
श्रेणी मामलों की संख्या
एनसीडीआरससी 16382
एससीडीआरसी 121922
डीसीडीआरसी 436029
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उपभोक्ताओं की समस्याओं का निदान तेजी से हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने उपभोक्ता आयोग गठित किए हैं। ये आयोग खाली पदों की समस्या से जूझ रहे है, जिससे उपभोक्ताओं को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। लोकसभा की विशेष स्थायी समिति ने इस खाली पदों की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। समिति ने केंद्र सरकार को राज्य व जिला स्तर पर खाली पड़े इन पदों को भरने के आदेश दिए हैं। केंद्र सरकार को स्पष्ट कहा गया है कि वे एक निश्चित समय सीमा के अंदर इन खाली पदों को भरने के काम को पूर्ण करे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
