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किसान आंदोलन पर केंद्र की ‘कार्यशैली’ से 80% संतुष्ट, पर 34% ही मानते हैं अन्नदाताओं को होगा लाभ- MOTN Poll

जहां 34% लोगों ने कहा कि कानून किसानों को फायदा पहुंचाते हैं वहीं 32% लोगों ने कहा कि ये कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाते हैं।

किसानों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। (PTI)

मोदी सरकार के लिए बीता कुछ वक्त राहत भरा नहीं रहा है। जहां सरकार एक मोर्चे पर कोरोनावायरस से लड़ रही है। वहीं, पिछले साल नवंबर से ही दिल्ली की सीमा पर कृषि कानूनों के विरोध में किसान टिक गए हैं। जोकि केंद्र की बीजेपी सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं। जहां एक ओर किसान लगातार केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं वही मूड ऑफ द नेशन पोल के मुताबिक सरकार को इस मुद्दे पर जनता का समर्थन मिल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का दावा है कि ये कानून वही काम करेंगे जो कि 1960 के दशक में हरित क्रांति ने किया था। जिससे कि गेहूं और धान की पैदावार में इजाफा हुआ था। हालांकि पंजाब और हरियाणा के किसान सबसे ज्यादा इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। वे सरकार की बातों से संतुष्ट नहीं है और नवंबर से ही दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले हैं।

कृषि कानून के चलते लंबे वक्त से एनडीए में बीजेपी का साथी रहा शिरोमणि अकाली दल भी कृषि कानूनों के मुद्दे पर एनडीए से बाहर हो गया और हरसिमरत कौर बादल ने इस मुद्दे पर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। पोल के मुताबिक कृषि कानूनों को लेकर 80% जवाब देने वाले लोगों ने कहा कि सरकार जिस तरह से इस मुद्दे से निपट रही है वह इससे संतुष्ट हैं जबकि 16% लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।

हालांकि जब लोगों से पूछा गया कि यह कानून किस को ज्यादा फायदा पहुंचाते हैं किसानों को या कॉर्पोरेट को ? तो जहां 34% लोगों ने कहा कि किसानों को फायदा पहुंचाते हैं वहीं 32% लोगों ने कहा कि ये कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाते हैं। 25% लोगों ने कहा कि दोनों को फायदा पहुंचाएंगे।

क्या कृषि कानूनों में संशोधन होना चाहिए? 55% लोगों ने कहा कि वे कानूनों में संशोधन का समर्थन करते हैं। जबकि 28% लोगों ने कहा कि किसानों की मांग के हिसाब से कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। 10 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार को कानून को लेकर झुकना नहीं चाहिए।

लव जिहाद हिंदू औरतों का धर्म परिवर्तन करने की एक साजिश है ? इस सवाल के जवाब में मूड ऑफ नेशन पोल में 54% लोगों ने हां जवाब दिया और 36% लोगों ने ना कहा। पोल में 54% लोगों ने कहा कि वे अंतर धार्मिक विवाह का समर्थन नहीं करते हैं जबकि 41% लोगों ने कहा कि वे इसका समर्थन करते हैं। 58% लोगों ने कहा कि अंतर धार्मिक विवाह को लेकर कानून बनाना चाहिए जबकि 35% लोगों ने कहा कि कानून नहीं बनाना चाहिए।

मूड ऑफ द नेशन पोल मार्केट रिसर्च एजेंसी कार्वी इनसाइट्स द्वारा 3 जनवरी से 13 जनवरी 2021 के बीच किया गया । कुल 12,232 इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। ग्रामीण इलाकों में 67% और शहरी इलाकों में 33 % इंटरव्यू लिए गए। 19 राज्यों, 97 लोकसभा क्षेत्रों और 194 विधानसभा क्षेत्रों में पोल किया गया।

 

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