पांच साल पहले शुरू हुआ केंद्रीय विश्वविद्यालय, किचेन और खाली कमरों में खोल दिए गए 26 सेंटर, शिक्षकों का अता-पता नहीं

पांच साल पहले मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय का संचालन शुरू हुआ था। आज स्थिति यह है कि इसके केंद्र का सही पता भी नहीं है। केवल वेबसाइट पर सेंटर चल रहे हैं। पता लगाने पर बोर्ड और खाली कमरा ही नज़र आता है।

MGCU का एक सेंटर। फोटो- संतोष सिंह @एक्सप्रेस

बिहार के मोतिहारी में आज से पांच साल पहले एक केंद्रीय विश्वविद्यालय शुरू किया गया था। पिछले एक साल के दौरान यह विश्वविद्यालय इस तरह वीरान नज़र आने लगा है जैसे कि वर्षों पहले ही इसमें पठन-पाठन का कार्यक्रम बंद हो गया है। अंबेडकर और गांधी से लेकर योगा और साइबर सिक्यॉरिटी तक के पाठ्यक्रम के सेंटर अब ढूंढने से भी नहीं मिलने वाले। मोतिहारी की ‘महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी’ में कहीं गोदाम पर बोर्ड लगाकर सेंटर बना दिया गया तो कहीं किचेन के स्टोर को ही ऑफिस बता दिया गया।

महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी (MGCU) की स्थापना को पार्ल्यामेंट ऐक्ट 2014 के तहत मंजूरी दी गई थी और 2016 में यह विश्वविद्यालय शुरू हुआ था। इसे 24 एकड़ के कैंपस में और चार किराए के परिसरों मे शुरू किया गया। इसमें 120 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। 1300 छात्रों का ऐडमिशन लिया गया जिसमें से 350 रिसर्च स्कॉलर थे।

ज्यादातर सेंटर में आज भी फैकल्टी नहीं है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की पड़ताल में पता चला कि पांच सेंटर तो ऐसे हैं जो कि शिक्षकों के ऑफिस से ही चलते हैं। वे सेंटर कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करते हैं। वहीं इसी साल अक्टूबर में तीन सेंटर शुरू किए गए जिनमें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां बैठने के लिए फर्नीचर तक का इंतजाम नहीं किया गया।

सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एजुकेशन
छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर बनाए गए इस सेंटर का उद्घाटन पिछले ही महीने हुआ है। इसके लिए एक खाली 10×10 के किचेन का इस्तेमाल किया गया। इसका अब तक को ई अलग से कोऑर्डिनेटर या फैकल्टी नहीं है। स्कूल ऑफ एजुकेशन के कोऑर्डिनेटर अशीष श्रीवास्तव ने बताया कि यहां पर इंटर डिसिप्लिनरी रिसर्च होगी इसलिए अभी अलग से फैकल्टी की जरूरत नहीं है। जब केंद्र के लिए जगह पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं केवल शैक्षिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दे सकता हूं।’

काशी प्रसाद जैसवाल हिंदू स्टडी सेंटर
इस केंद्र का उद्घाटन भी एक महीने पहले 10×10 के एक कमरे में किया गया। वेबसाइट पर इसका जिक्र किया गया है लेकिन इसके नाम पर अलॉट किया गया कमरा एकदम खाली है। इसके कोऑर्डिनेटर विश्वेस ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

कौशल विकास का भी एक सेंटर 8×10 के कमरे में शुरू किया गया था लेकिन इसके बारे में भी कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। कमरा पूरी तरह खाली है। वहीं MMM स्कूल ऑफ कॉमर्स के कोऑर्डिनेटर ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बता दें कि ये तीनों ही सेंटर यूनिवर्सिटी के किराए वाले परिसर में हैं। इसे महात्मा बुद्ध परिसर के नाम से जाना जाता है। यह मेन कैंपस के बिल्कुल बगल स्थित है और अक्टूबर में इसे 4 लाख रुपये प्रति महीने के हिसाब से किराए पर लिया गया।

तीने सेंटर ऐसे, जिनका पता ही नहीं मालूम
कम से कम तीन सेंटर ऐसे हैं जिनका कोई फिजिकल ऐड्रेस नहीं है। इसमें महर्षि पतंजलि योग एवं आयुर्वेद अध्ययन केंद्र, गांधी शोध केंद्र और प्रवासी अध्ययन केंद्र शामिल हैं। इन सेंटर्स के कोऑर्डिनेटर से जब संपर्क किया गया तो या तो उन्होंने फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा, या फिर टिप्पणी करने से बचते रहे।

मानविकी एवं भाषा संकाय के अंतरगत बनाए गए भारत विद्या केंद्र का संचालन एक कमरे के ऑफिस से होता है जो कि किसी शिक्षक का कार्यालय है। यह कमरा भी दो अध्यापक शेयर करते हैं। इसके कोऑर्डिनेटर प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि जल्द ही इसके लिए अलग से जगह मिल जाएगी। इन बातों को लेकर वीसी संजीव कुमार शर्मा और प्रॉक्टर प्रनवीर सिंह को दो बार मेल किया गया लेकिन उनका जवाब नहीं मिला।

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