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Dalit Student Suicide Case: रोहित की मौत पर मोदी का मौन भंग, हुए गमगीन

हैदराबाद में छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि इस घटना से वे व्यथित हैं।

Author नई दिल्ली | January 23, 2016 12:41 AM
रोहित की मौत पर गमगीन हुए पीएम मोदी

हैदराबाद में छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि इस घटना से वे व्यथित हैं। लखनऊ के भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री ने जैसे ही अपना भाषण शुरू किया, सभागार में बैठे दो छात्रों ने नरेंद्र मोदी के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। छात्रों की नारेबाजी की वजह से खुद प्रधानमंत्री भी कुछ पलों के लिए असंयत हो गए। बाद में उन्होंने रोहित वेमुला का जिक्र करते हुए कहा कि मेरे ही देश के एक बेटे रोहित को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने आए प्रधानमंत्री ने सभागार में जैसे ही अपना भाषण शुरू किया, पीछे बैठे दो छात्रों ने मोदी वापस जाओ, नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद, के नारे लगाने शुरू कर दिए। दोनों विश्वविद्यालय के छात्र हैं। आनन-फानन में सुरक्षाकर्मियों ने दोनों छात्रों को कब्जे में ले लिया। इस बीच प्रधानमंत्री ने अपना भाषण जारी रखा।

उन्होंने रोहित वेमुला को यह कहते हुए श्रद्धांजलि दी कि मेरे ही देश के एक बेटे रोहित को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा। रोहित का जिक्र करते हुए भावुक हुए नरेंद्र मोदी ने खुद सवाल किया उसके परिवार पर क्या बीती होगी? उन्होंने कहा कि मां भारती ने अपना एक लाल खोया। कारण अपनी जगह होंगे, राजनीति अपनी जगह पर होगी। लेकिन सच्चाई यह है कि एक मां ने अपना लाल खोया, जिसकी पीड़ा मैं भलीभांति महसूस कर सकता हूं।

रोहित की आत्महत्या के बाद पहली बार लखनऊ आए प्रधानमंत्री ने पहली बार रोहित पर यह शब्द कहे। दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री के विरोध को कुछ छात्रों ने सही ठहराया, जबकि कुछ ने इसे राजनैतिक दलों की साजिश करार दिया है। छात्रों के विरोध के बावजूद जारी अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने डॉ भीमराव आंबेडकर का कई बार जिक्र किया। शिक्षा के महत्त्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ आंबेडकर कहते थे कि सभी कठिनाइयों से मुक्ति का रास्ता शिक्षा है। संघर्ष से विजयी होने का रास्ता भी शिक्षा ही है।

शिक्षा खुद को प्रकाशित करती है और यह प्रकाश हर तरह के अंधकार हरता है। डॉ भीमराव आंबेडकर को विराट व्यक्तित्व बताते हुए मोदी ने कहा कि उनको समझना हमारे दायरे से बाहर है। बाबा साहब ने हर क्षेत्र में संघर्ष कर मुकाम हासिल किया। वे पहले भारतीय थे जिन्होंने अमेरिका में अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की।

लेकिन उन्होंने खुद से अधिक देश को तरजीह दी। यही वजह थी कि उन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया। दीक्षांत समारोह के उद्गम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उपनिषद में सर्वप्रथम दीक्षांत समारोह का जिक्र मिलता है। उस वक्त गुरुकुल में छात्रों को दीक्षा दी जाती थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी शिक्षा में गुरुजनों और अभिभावकों के अलावा समाज और देश का भी बड़ा योगदान है। छात्रों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा कि असफलता ही सफलता का मूल है। अपनी असफलताओं से जो नहीं सीखना चाहते उन्हें जीवन में कभी सफलता नहीं मिलती। असफलता को सफलता में तब्दील करने वाले ही सफल कहलाते हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हिंदुस्तान सबसे जवान देश है। यहां की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष या उससे कम है।

यहां से प्रधानमंत्री कालविन ताल्लुकेदार कॉलेज पहुंचे जहां मंच तक की दूरी उन्होंने ई-रिक्शा पर बैठ कर तय की। उन्होंने कहा कि दुनिया में अकेले भारत ही ऐसा देश है जो तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विश्व बैंक समेत पूरा विश्व समवेत स्वर में स्वीकार कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में भारत का विकास तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि जब वे ऐसी बातें सुनते हैं तो उन्हें बहुत इत्मीनान होता है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य देश के गरीबों के जीवन में बदलाव लाना और नौजवानों को रोजगार देना है। हमारा लक्ष्य युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश है कि देश का नौजवान नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने के बजाय आत्मनिर्भर होकर औरों को भी रोजगार दे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिसके बल पर देश के आर्थिक विकास में युवा भागीदार बनेंगे। चालीस साल पहले बैंकों का राष्टीयकरण हुआ था। उस वक्ततर्क दिए गए थे कि देश से गरीबी हटाने के लिए बैंकों का राष्टÑीयकरण आवश्यक है। लेकिन चालीस साल बाद भी देश के गरीबों के लिए बैंकों के दरवाजे नहीं खुले।

उन्होंने कहा कि बैंकों में गरीबों के खाते खुलवाने में प्रधानमंत्री जनधन योजना ने अहम योगदान दिया जिसकी वजह से 20 करोड़ नए खाते बैंकों में खोले गए। हमारे देश के गरीबों की अमीरी देखिए। उन्होंने तीस हजार करोड़ रुपए बैंकों में जमा किए। हमारे देश का गरीब मूल्यों और उसूलों के लिए जीता है। गरीबों ने मुफ्त में खाते नहीं खुलवाए। इतने गहरे हैं हमारे मूल्य। उन्होंने कहा कि 21 सौ परिवारों को आज रिक्शा देकर मालिक बनाया जा रहा है। ये वे लोग हैं जो पहले किराए पर लेकर रिक्शा चलाते थे। लखनऊ में ई-रिक्शा की बैटरी रिचार्ज के लिए 42 सेंटर और सर्विसिंग के लिए दस केंद्र बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश सामान्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना है।

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