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ऑक्सीजन : भारत में सर्वाधिक उत्पादन, फिर भी हाहाकार क्यों

भारत दुनिया के उन देशों में शुमार है, जो बड़े पैमाने पर आॅक्सीजन का उत्पादन करते हैं। भारत में जरूरत से ज्यादा आॅक्सीजन का उत्पादन होता रहा है, लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर में देश में जबरदस्त संकट आॅक्सीजन की कमी का दिख रहा है।

oxygenसांकेतिक फोटो।

भारत दुनिया के उन देशों में शुमार है, जो बड़े पैमाने पर आॅक्सीजन का उत्पादन करते हैं। भारत में जरूरत से ज्यादा आॅक्सीजन का उत्पादन होता रहा है, लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर में देश में जबरदस्त संकट आॅक्सीजन की कमी का दिख रहा है। देश के कई हिस्सों में अस्पतालों में पर्याप्त आॅक्सीजन की कमी की खबरें सामने आई हैं। सवाल उठने लगा है कि अपनी जरूरत से ज्यादा आॅक्सीजन उत्पादन करने वाले भारत में आॅक्सीजन संकट क्यों आया है? आॅक्सीजन उत्पादन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में आॅक्सीजन संकट की वजह उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि आपूर्ति के लिए पर्याप्त ढांचागत इंतजाम का न होना है।

भारत में अधिकतर आॅक्सीजन का उत्पादन ओड़ीशा और झारखंड जैसे पूर्वी राज्यों में होता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में आॅक्सीजन का उत्पादन जरूरत की तुलना में बेहद कम है। उत्तरी और मध्य राज्यों में आॅक्सीजन संकट की एक बड़ी वजह ये भी है कि भारत में आॅक्सीजन उत्पादित करने वाली अधिकतर इकाइयां राजधानी दिल्ली से एक हजार से अधिक किलोमीटर तक दूर हैं।

आॅक्सीजन की ढुलाई में एक और बड़ी दिक्कत यह है कि जिन क्रायोजेनिक टैंक का इस्तेमाल किया जाता है, उसे बनाना आसान नहीं है। एक टैंक के निर्माण में चार से छह महीनों तक का समय लग जाता है। हवाई मार्ग से भी सिर्फ खाली क्रायोजेनिक टैंक को ही ले जाया जा सकता है। भारतीय वायुसेना ऐसा करके एक तरफ का समय जरूर कम कर सकती है। भरे हुए टैंकों को ट्रेन या ट्रक के जरिए ही ले जाया जा सकता है।

कॉन्फेडरेशन आॅफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआइआइ) के एक अधिकारी कहते हैं, ओड़ीशा या झारखंड से आॅक्सीजन उत्तर भारत के प्रदेशों में टैंकरों के जरिए लाने में आमतौर पर पांच से सात दिन लग जाते हैं। ऐसे में वायुसेना की मदद भी ली जा रही है, जो खाली टैंकरों को प्लांट तक पहुंचा रही है।

वही, स्टील अथॉरिटी आॅफ इंडिया अपने भिलाई, बोकारो, दुगार्पुर और बनर्पुर के इस्पात कारखानों से अगस्त से अब तक करीब 40 हजार मीट्रिक टन मेडिकल आॅक्सीजन की आपूर्ति कर चुकी है। भारत के कई राज्य इन इकाइयों से मिलने वाली आॅक्सीजन पर निर्भर हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भी शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज रोजाना सात सौ मीट्रिक टन आॅक्सीजन गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दमन, दीव और नागर हवेली को भेज रही है।

सीआइआइ टास्कफोर्स के चैयरमैन और जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक एमवीएस शेशागिरी राव के मुताबिक, टास्क फोर्स ने सरकार को जी-टु-जी यानी सरकार के बीच मैकेनिज्म स्थापित करने की सलाह भी दी है ताकि मौजूदा स्वास्थ्य आपातकाल में मित्र देशों का सहयोग लिया जा सके। टास्क फोर्स स्टील प्लांट से आॅक्सीजन सप्लाई को बढ़ाने के प्रयास भी कर रही है। भारत सरकार ने 50,000 टन तरल आॅक्सीजन आयात करने का टेंडर भी दिया है। एक अधिकारी के मुताबिक ये आॅक्सीजन भारत तक पहुंचने में कम से कम दो सप्ताह का समय तो लग ही जाएगा।

इंतजाम

आॅक्सीजन मूलत: तीन तरह से उत्पादित की जाती है। बड़े-बड़े एअर सेपरेशन इकाइयों में, मध्यम स्तर के प्रेशर स्विंग एडसर्प्शन में और छोटे-छोटे आॅक्सीजन कंसेंट्रेटर में, जो आमतौर पर घरों या अस्पतालों में इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत में आॅइनॉक्स एअर सबसे बड़ी आॅक्सीजन निर्माता कंपनी है, जो देश में अपने 44 प्लांट में आॅक्सीजन निर्मित करती है। कोविड संकट से पहले कंपनी 2000 मीट्रिक टन आॅक्सीजन उत्पादन कर रही थी, जिसे अस्पतालों और उद्योगों में भेजा जा रहा था।

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