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बीएसएफ जवान तेज बहादुर के आरोपों पर गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू बोले- एक वीडियो से निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए

दिल्ली हाई कोर्ट में एक पूर्व सैनिक ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में देशभर में तैनात पारा मिलिट्री फोर्सेज को मिलने वाले खान-पान पर स्टेटस रिपोर्ट की मांग की गई है।

गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू (फाइल फोटो)

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने पहली बार बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव के आरोपों पर मुंह खोला है। उन्होंने बीएसएफ का बचाव करते हुए कहा कि सिर्फ एक वीडियो टेप के आधार पर हमें किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। रिजिजू का यह बयान तेज बहादुर यादव की पत्नी के उस बयान के बाद आया है जिसमें कहा गया है कि तेज बहादुर को अपनी शिकायत वापसे लेने के साथ-साथ माफी मांगना के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री के बयान के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में एक पूर्व सैनिक ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में देशभर में तैनात पारा मिलिट्री फोर्सेज को मिलने वाले खान-पान पर स्टेटस रिपोर्ट की मांग की गई है। इधर, तेज बहादुर का तबादला दूसरी यूनिट में किया जा चुका है। उसे अब प्लम्बर का काम सौंपा गया है।

गौरतलब है कि यादव की पत्नी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा था, ‘उन्होंने जो किया वह गलत नहीं है। उन्होंने सच्चाई दिखाई है और अच्छा खाना मांगा है।’ साथ ही कहा कि यह कहना कि उनकी मानसिक स्थिति सही नहीं है, यह गलत है। अगर इसमें सच्चाई है तो उन्हें सीमा पर क्यों भेजा गया और ड्यूटी पर क्यों तैनात किया गया? उन्हें ईलाज के लिए क्यों नहीं भेजा गया? यादव के बेटे ने साथ ही कहा कि अपने और सीमा पर तैनात जवानों के लिए अच्छा खाना मांगना गलत नहीं है।

आठ जनवरी को पोस्ट किए गए वीडियो में यादव ने कहा था, ‘हम किसी सरकार पर आरोप नहीं लगाना चाहते, सभी सरकारों ने हमें खाना उपलब्ध करवाया है, लेकिन कुछ सीनियर अधिकारी उन्हें बेच देते हैं। स्थिति ऐसी है कि कई बार हमें भूखे पेट सोना पड़ता है।’ इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया था। वीडियो के मीडिया में आने के बाद गृहमंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके साथ ही गुरुवार को प्रधानमंत्री ऑफिस ने इस मामले में गृहमंत्रालय से रिपोर्ट तलब की है।

वीडियो देखिए- BSF जवान की शिकायत पर PMO ने गृहमंत्रालय से मांगी जानकारी; पत्नी का दावा- “शिकायत वापस लेने और माफी मांगने का दबाव”

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