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‘पूरी इंटेलिजेंस की नाकामी है गलवान में चीनी घुसपैठ और खूनी झड़प, तुरंत बदलें खुफिया तंत्र’, 140 मिलिट्री वेटरन्स ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

चिट्ठी में 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए राजनैतिक, सामाजिक और सैन्य स्तर की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया गया है।

PM Modi , India china tension, indian armyचिट्ठी में चाइनीज घुसपैठ पर पीएम मोदी के बयान का भी उल्लेख किया गया है। (pti photo)

140 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों ने पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में चीन द्वारा की गई घुसपैठ के बारे में जवाब देने की मांग की गई है। इसके साथ ही चिट्ठी में 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए राजनैतिक, सामाजिक और सैन्य स्तर की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस चिट्ठी में पीएम मोदी के उस बयान का भी खास तौर पर उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने भारतीय सीमा में किसी भी घुसपैठ की बात से इंकार किया था।

चिट्टी में सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि पीएम के बयान का बीजिंग ने उल्लेख करते हुए पूरी गलवान घाटी पर अपना दावा पेश कर दिया था। हालांकि बाद में पीएमओ की तरफ से साफ किया गया था कि पीएम मोदी ने जो बयान दिया है, गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद की स्थिति को लेकर दिया गया था।

चिट्ठी में कहा गया है कि अस्पष्ट, मौखिक और विरोधाभासी बयान का चीन ने फायदा उठाया। चिट्ठी में पूर्व सैन्य अधिकारियों ने मांग की है कि राजनैतिक नेतृत्व और राष्ट्रपति तथ्यों की जांच के लिए एक समिति बनाएं, जो लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ, जमीन कब्जाने की जांच करे और एक तय समय में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करे।

टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चिट्ठी पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल एल. रामदास के द्वारा लिखी गई है, जिसका 143 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने समर्थन किया है। इस चिट्ठी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों को भी संबोधित किया गया है।

चिट्ठी में कहा गया है कि ‘गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प एक या अनेक जगह पर राजनैतिक नेतृत्व, सामाजिक और मिलिट्री नेतृत्व की नाकामी हो सकती है। चिट्ठी में देश की खूफिया व्यवस्था को फिर से अपग्रेड भी करने की मांग की गई है। साथ ही मांग की गई है कि भारत चीन विवाद पर सरकार की तरफ से बयान जारी कर स्थिति साफ की जाए।’

पूर्व सैन्य अधिकारियों ने मांग की है कि ‘भविष्य में ऐसी किसी स्थिति में औपचारिक बयान जारी किए जाने चाहिए, ताकि जनता के बीच किसी तरह के संदेह की स्थिति ना पैदा हो ओर कोई अन्य देश इस बात का फायदा ना उठा सके।’

चिट्ठी में कहा गया है कि हम राजनैतिक नेतृत्व से अपील करते हैं कि हमारे विविधतापूर्ण राष्ट्र को सेक्यूलर आधार पर एकजुट रखा जा सकता है। लोगों का जाति, धर्म के आधार पर बंटवारा हतोत्साहित करना चाहिए और इसे लेकर पॉलिसी बनायी जानी चाहिए। चिट्ठी में चीन और पाकिस्तान समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाने की अपील की गई है।

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