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1 दिन भी किसी की आजादी छीनना गलत- SC का हवाला दे कहने लगे अर्णब, पैनलिस्ट ने दिलाया याद- 24 से अधिक पत्रकार हैं गिरफ्तार

मामला रिपब्लिक टीवी के हिंदी चैनल Republic Bharat के डिबेट शो Poochta Hai Bharat से जुड़ा है। 'रिपब्लिक से षडयंत्र फिर खंड-खंड' के मुद्दे पर इस दौरान चर्चा हो रही थी सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला ऐतिहासिक बताया जा रहा था।

Arnab Goswami, Republic TV, Republic Bharatटीवी पत्रकार अर्णब गोस्वामी मौजूदा समय में Republic TV के एडिटर-इन-चीफ हैं। (फाइल फोटोः fb)

Republic TV के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी शुक्रवार को एक डिबेट में कहने लगे कि किसी की भी एक दिन की आजादी छीनना गलत है। यह बात उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बयान का हवाला देते हुई कही। पर इसी पर उन्होंने चर्चा में शामिल पैनलिस्ट ने याद दिला दिया कि मौजूदा समय में 24 से अधिक पत्रकार गिरफ्तार हैं। इस पर अर्णब ने उन्होंने टोका और कहा कि आप बाद में अपनी बात रखें।

मामला रिपब्लिक टीवी के हिंदी चैनल Republic Bharat के डिबेट शो Poochta Hai Bharat से जुड़ा है। ‘रिपब्लिक से षडयंत्र फिर खंड-खंड’ के मुद्दे पर इस दौरान चर्चा हो रही थी सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला ऐतिहासिक बताया जा रहा था। इसी बीच, एंकर बोलने लगे, “कोर्ट ने कहा कि एक दिन भी किसी की आजादी छीन लेना गलत है, इसलिए यह केस सिर्फ मेरे लिए नहीं है। यह 130 करोड़ भारतीयों के लिए हैं। ये सोनिया सेना वालों को जरा समझाइए जीडी बख्शी साहब…।”

सैफ खान ने इसी पर कहा, “24 से अधिक गिरफ्तार हैं। मैं बताना चाहता हूं, अर्णब। नोट कर लीजिए।” देखें, डिबेट के दौरान क्या हुआ थाः

‘अर्नब के खिलाफ आत्महत्या के लिये उकसाने का मामला साबित नहीं होता’: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पहली नजर में प्राथमिकी के आकलन से अर्णब और दो अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिये उकसाने की खातिर जरूरी तथ्य साबित नहीं होते हैं। अदालत ने शिकायत में इन तीनों के खिलाफ लगाये गये आरोप और कानूनी प्रावधानों के बीच ‘विलग संबंध’ को नोटिस नहीं करने के लिये बंबई उच्च न्यायालय की तीखी आलोचना की। टॉप कोर्ट ने 2018 के आत्महत्या के लिये उकसाने के मामले में अर्नब गोस्वामी और दो अन्य की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने संबंधी फैसले में ये टिप्पणियां कीं।

न्यायमूति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि जब राज्य सत्ता की ज्यादती में किसी नागरिक को मनमाने तरीके से उसकी स्वतंत्रता से वंचित किया जाता है तो उच्च न्यायालय को अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से खुद को रोकना नहीं चाहिए। बेंच ने कहा कि इन मामलों में पहली नजर में प्राथमिकी के आकलन से भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिये उकसाने के अपराध के लिये अनिवार्य पहलू साबित नहीं होते हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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