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कोरोनाः पहले ही दिन टारगेट से पीछे रहा वैक्सिनेशन, 43% रह गए महरूम

स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन के लाभार्थियों के डेटा को अपलोड करने के लिए बनाए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म और लोगों के वैक्सीन पर कम भरोसे के चलते पहले दिन टीकाकरण की रफ्तार धीमी रही।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: January 17, 2021 9:24 AM
Coronavirus, COVID-19 Vaccineदिल्ली में कोरोनावायरस की वैक्सीन लगवाती महिला। ( सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारत में 16 जनवरी से शुरू हुए वैक्सीनेशन प्रोग्राम से देशवासियों को काफी उम्मीद है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह इस साल के मध्य तक ही सभी स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के टीकाकरण की प्रक्रिया को पूरा कर लेगी। हालांकि, अगर पहले दिन के आंकड़ों की बात की जाए, तो वैक्सीनेशन में दिन का लक्ष्य 43 फीसदी के बड़े अंतर से चूक गया। इसकी कई वजहें रहीं, हालांकि टीकाकरण प्रक्रिया की शुरुआत में देरी और कुछ तकनीकी परेशानियां दो सबसे बड़ी समस्याएं बनकर उभरीं।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार के दिन सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में बनाए गए 3352 वैक्सीनेशन साइट्स पर 1 लाख 91 हजार स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हर केंद्र पर कम से कम 100 लोगों को टीका देने का लक्ष्य रखा गया था। यानी पहले दिन करीब 3 लाख 35 हजार लोगों को कोरोना का टीका लग जाना था। पर अलग-अलग समस्याओं की वजह से पहले दिन 1,91,181 लाभार्थियों को ही वैक्सीन लग सकी। यह टारगेट का सिर्फ 57 फीसदी ही रहा।

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने वैक्सीनेशन प्रक्रिया में देरी के पीछे डिजिटल प्लेटफॉर्म की कमियों को वजह बताया। उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान के लिए मुहैया कराए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म में कई लाभार्थियों की लिस्ट अपलोड करने में काफी देरी हो रही थी। अधिकारी ने बताया कि शाम 5 बजे तक किसी भी वैक्सीनेशन साइट से वैक्सीन के गंभीर असर या किसी लाभार्थी को अस्पताल ले जाने से जुड़ी खबरें नहीं आईं। हालांकि, पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि कोलकाता में वैक्सीनेशन के बाद अचेत हुई एक नर्स को अस्पताल ले जाना पड़ा था।

दिल्ली में भी आधे स्वास्थ्यकर्मियों को ही लग पाई वैक्सीन: देशभर के कई अस्पतालों में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन की डोज भी भेजी गईं। इसके चलते भी वैक्सीनेशन में कमी देखी गई। दरअसल, कुछ जगहों पर स्वास्थ्यकर्मियों ने कम रिसर्च वाली कोवैक्सिन की जगह कोविशील्ड को ही प्राथमिकता दी। हालांकि, कुछ अस्पतालों में कोविशील्ड की गैरमौजूदगी की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों ने टीका ही नहीं लगवाया।

AIIMS के एक डॉक्टर ने बताया कि उनके कुछ साथियों ने वैक्सीन नहीं लगवाई। इसके बाद कुछ अन्य हेल्थकेयर वर्कर्स, जिनका नाम लिस्ट में नहीं था, उन्हें वैक्सीन लगाई गई। इसके चलते भी वैक्सीनेशन प्रक्रिया में देरी आ गई। राजधानी दिल्ली में ही पहले दिन 8117 स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगने थे, पर शाम 5 बजे तक कुल 4319 लोगों को ही वैक्सीन लग सकी। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि वैक्सीनेशन की गति देश में जल्द ही बढ़ेगी।

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